नई दिल्ली: न्याय मिलने में हुई देरी का एक बेहद मार्मिक उदाहरण उत्तर प्रदेश के 1977 के चर्चित हत्या मामले में सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने 45 साल बाद ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों को बरी कर दिया। हालांकि, इस फैसले की सबसे बड़ी विडंबना यह रही कि इनमें से एक आरोपी अपनी पूरी उम्रकैद की सजा पहले ही जेल में काट चुका था और बाद में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सजा माफ किए जाने के बाद ही उसकी रिहाई हो सकी। 1977 में हुए इस…
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44 साल पहले मैनपुरी में जातीय संघर्ष में 24 लोगों के सामूहिक हत्याकांड के मामले में दो की मौत की सजा उम्रकैद में तब्दील
पुख्ता सबूत न होने पर एक आरोपित बरी प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मैनपुरी में नवम्बर 1981 में जातीय संघर्ष में 24 लोगों की सामूहिक हत्या के मामले में जीवित बचे आरोपितों राम सेवक व कप्तान सिंह को सत्र न्यायालय से मिली सजा को सही करार दिया है। लेकिन उसे उम्रकैद में तब्दील कर दिया है। साथ ही आरोपित रामपाल सिंह की मौत की सजा सबूतों के अभाव के कारण रद्द करते हुए उसे बरी कर दिया है। मामले के कई आरोपितों की ट्रायल के दौरान मृत्यु हो चुकी है…
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