लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव नहीं होने के बाद प्रशासक बनाए गए ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों को बड़ी प्रशासनिक राहत मिली है। सरकार ने इनके प्रशासक के रूप में कार्य करने के लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी है। नए दिशा-निर्देश लागू होने से अब लंबित भुगतान और विकास कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है। साथ ही नियमित और नीतिगत कार्यों के संचालन को लेकर बनी असमंजस की स्थिति भी समाप्त हो जाएगी।
पुराने विकास कार्यों का होगा भुगतान, नियमित कामकाज भी रहेगा जारी
नई गाइडलाइन के अनुसार, पांच वर्ष का कार्यकाल समाप्त होने से पहले कराए गए निर्माण और अन्य विकास कार्यों का भौतिक एवं तकनीकी सत्यापन कराने के बाद पहले की तरह भुगतान किया जा सकेगा। इसके अलावा ब्लॉक और जिला पंचायतों में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन सहित नियमित प्रशासनिक कार्य भी पूर्व व्यवस्था के अनुसार जारी रहेंगे। पहले स्पष्ट दिशा-निर्देश न होने के कारण कई जिलों में भुगतान और फाइलों का निस्तारण प्रभावित हो रहा था।
बोर्ड से स्वीकृत लेकिन शुरू न हुए कार्यों को भी मिलेगी मंजूरी
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रशासक नियुक्त किए जाने से पहले बोर्ड से स्वीकृत ऐसे विकास कार्य, जिनकी निविदा हो चुकी है लेकिन निर्माण शुरू नहीं हो पाया है, उन्हें अब शुरू कराया जा सकेगा। हालांकि इसके लिए संबंधित ब्लॉक प्रमुख को जिलाधिकारी से अनुमोदन लेना अनिवार्य होगा।
शासकीय और विभागीय बैठकें नहीं कर सकेंगे प्रशासक
गाइडलाइन में यह भी तय किया गया है कि नई क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के गठन तक प्रशासक के रूप में कार्य कर रहे ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष किसी भी शासकीय या विभागीय बैठक की अध्यक्षता नहीं कर सकेंगे। यदि किसी नीति, नियम, न्यायालय के आदेश या अन्य आवश्यक कारणों से कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेना जरूरी होगा, तो ब्लॉक प्रमुख जिलाधिकारी की अनुमति से कार्रवाई कर सकेंगे।
जिला पंचायत अध्यक्षों के लिए मंडलायुक्त से अनुमति जरूरी
जिला पंचायत अध्यक्षों को आवश्यक प्रशासनिक कार्यों के लिए मंडलायुक्त से अनुमति लेनी होगी। मंडलायुक्त को अधिकतम 15 दिनों के भीतर निर्णय लेकर संबंधित जिलाधिकारी और जिला पंचायत को इसकी सूचना देनी होगी। वहीं जिन ब्लॉक प्रमुखों के खिलाफ किसी मामले में कार्रवाई की गई है, उनकी जगह संबंधित उप जिलाधिकारी प्रशासक के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे।
कार्यकाल समाप्त होने के बाद बनाई गई थी प्रशासक व्यवस्था
जिला पंचायत अध्यक्षों का पांच वर्षीय कार्यकाल 11 जुलाई और ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल 19 जुलाई को समाप्त होने के बाद उन्हें प्रशासक के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इससे पहले ग्राम प्रधानों के लिए भी प्रशासक के रूप में कार्य करने संबंधी गाइडलाइन जारी की जा चुकी है।
