नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर लंबे समय से दावा किया जा रहा है कि यह लोगों का काम आसान बनाएगा और समय की बचत करेगा। हालांकि टेक इंडस्ट्री में काम कर रहे कई पेशेवरों का अनुभव इससे अलग नजर आ रहा है। एक सॉफ्टवेयर डेवलपर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit पर दावा किया कि AI ने काम का बोझ कम करने के बजाय बढ़ा दिया है। उनका कहना है कि अब कंपनियां कम समय में पहले से अधिक काम की उम्मीद कर रही हैं, जबकि वेतन में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है।
डेवलपर ने Reddit के r/developersIndia फोरम पर “Anyone else feel we’re having to work more due to AI?” शीर्षक से अपनी पोस्ट साझा की। यह पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गई और बड़ी संख्या में डेवलपर्स ने इससे सहमति जताई।
पहले कई दिनों में पूरा होता था एक प्रोजेक्ट
डेवलपर ने बताया कि वर्ष 2021 से 2024 के बीच सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट विकसित करने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत धीमी और व्यवस्थित थी। किसी सामान्य CRUD API को तैयार करने के लिए पहले आवश्यकताओं का विश्लेषण, फिर तकनीकी दस्तावेज तैयार करना, समीक्षा, कोडिंग, टेस्टिंग, पुल रिक्वेस्ट रिव्यू और अंत में प्रोडक्शन पर डिप्लॉयमेंट जैसी कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था। इस पूरी प्रक्रिया में कई दिन लगते थे और इसे सामान्य कार्यप्रणाली माना जाता था।
इंटर्न संभालने में भी जाता था काफी समय
डेवलपर के मुताबिक उस समय वह चार इंटर्न की टीम का नेतृत्व कर रहे थे। उनका अधिकांश समय इंटर्न को मार्गदर्शन देने, उनकी गलतियां सुधारने और उन्हें प्रशिक्षण देने में निकल जाता था। ऐसे में उन्हें स्वयं ज्यादा कोड लिखने का अवसर नहीं मिलता था, लेकिन उस समय प्रोजेक्ट की समयसीमा भी उसी हिसाब से तय की जाती थी।
AI आने के बाद बदल गई कंपनियों की उम्मीदें
पोस्ट में कहा गया कि वर्ष 2025 के बाद AI टूल्स के तेजी से इस्तेमाल ने कार्यशैली पूरी तरह बदल दी। जिन कामों को पहले पूरा करने में कई दिन लगते थे, अब उन्हें एक या दो दिन में पूरा करने की अपेक्षा की जाती है। कंपनियों का मानना है कि AI उपलब्ध होने के कारण डेवलपर्स को पहले की तुलना में अधिक तेज़ी से काम करना चाहिए।
सीनियर डेवलपर्स पर बढ़ा अतिरिक्त दबाव
डेवलपर ने बताया कि अब जूनियर डेवलपर्स और इंटर्न AI की मदद से तेजी से कोड तैयार कर लेते हैं, लेकिन उस कोड की गुणवत्ता और शुद्धता की जांच की जिम्मेदारी सीनियर डेवलपर्स पर आ जाती है। इससे उनकी जिम्मेदारियां पहले से अधिक बढ़ गई हैं। उन्हें टीम के अन्य सदस्यों के काम की समीक्षा करने के साथ-साथ खुद भी पहले से अधिक कोड लिखना पड़ रहा है।
‘काम बढ़ा, लेकिन वेतन वही रहा’
डेवलपर ने व्यंग्यात्मक अंदाज में लिखा कि AI ने टेक इंडस्ट्री की उन अपेक्षाकृत सहज प्रक्रियाओं को खत्म कर दिया है, जिनसे काम का दबाव संतुलित रहता था। अब हर समय तेज गति से काम करने का दबाव महसूस होता है, जबकि वेतन लगभग पहले जैसा ही है।
कई डेवलपर्स ने जताई सहमति
इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कई डेवलपर्स ने कहा कि उन्होंने भी हाल के वर्षों में यही बदलाव महसूस किया है। उनका कहना था कि AI ने कोड लिखना जरूर आसान बनाया है, लेकिन कंपनियों ने उसी अनुपात में डेडलाइन भी घटा दी है।
कुछ डेवलपर्स ने यह भी कहा कि AI कोड तैयार करने में मदद कर सकता है, लेकिन उसकी गुणवत्ता, सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी अभी भी इंसानों की ही है। यदि AI से तैयार कोड में कोई त्रुटि रह जाए तो उसका असर पूरे प्रोजेक्ट पर पड़ सकता है। ऐसे में हर लाइन की सावधानीपूर्वक समीक्षा करना अब भी जरूरी है।
बढ़ी बहस- वरदान है या बढ़ता दबाव?
इस चर्चा ने टेक इंडस्ट्री में एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या AI वास्तव में कर्मचारियों का काम आसान बना रहा है या फिर उसने केवल काम की रफ्तार और कंपनियों की अपेक्षाएं बढ़ा दी हैं। कई पेशेवरों का मानना है कि AI ने काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव जरूर किया है, लेकिन इसके साथ काम का दबाव भी पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है।
