सिर्फ डिटॉक्स ड्रिंक से नहीं रहेगा लिवर सुरक्षित, हेपेटाइटिस-बी से बचाव और समय पर जांच भी है बेहद जरूरी

नई दिल्ली: लिवर शरीर का एक अहम अंग है, जो खून को साफ करने, पाचन में मदद करने, ऊर्जा को संग्रहित करने और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने का काम करता है। ऐसे में कई लोग लिवर को स्वस्थ रखने के लिए डिटॉक्स ड्रिंक, हर्बल सप्लीमेंट और घरेलू उपायों का सहारा लेते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि केवल डिटॉक्स पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। लिवर को गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए संतुलित जीवनशैली, नियमित स्वास्थ्य जांच और हेपेटाइटिस-बी से बचाव बेहद जरूरी है।

क्या है हेपेटाइटिस-बी और क्यों है खतरनाक?

हेपेटाइटिस-बी एक वायरल संक्रमण है, जो सीधे लिवर को प्रभावित करता है। कई मामलों में शुरुआती चरण में इसके कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, जिससे संक्रमित व्यक्ति लंबे समय तक बीमारी से अनजान रह सकता है। यदि संक्रमण लंबे समय तक बना रहे, तो यह लिवर में सूजन, फाइब्रोसिस, सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।

किन तरीकों से फैलता है संक्रमण?

हेपेटाइटिस-बी संक्रमित रक्त, संक्रमित सुई, असुरक्षित यौन संबंध और संक्रमित मां से नवजात शिशु में फैल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, रक्त चढ़ाने से पहले उसकी जांच, एक बार इस्तेमाल होने वाली सुई का उपयोग और सुरक्षित स्वास्थ्य संबंधी आदतें अपनाना संक्रमण के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। टैटू या पियर्सिंग करवाते समय भी स्वच्छता और सुरक्षित उपकरणों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

हेपेटाइटिस-बी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका

विशेषज्ञों के मुताबिक, हेपेटाइटिस-बी से बचाव के लिए टीकाकरण सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है। जन्म के समय बच्चों को हेपेटाइटिस-बी का टीका लगाना जरूरी है। जिन लोगों का टीकाकरण नहीं हुआ है, उन्हें चिकित्सकीय सलाह के अनुसार वैक्सीन लगवानी चाहिए। साथ ही, जिन लोगों में संक्रमण का जोखिम अधिक है, उन्हें समय-समय पर जांच भी करानी चाहिए।

लिवर को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये आदतें

लिवर की बेहतर सेहत के लिए संतुलित आहार को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना जरूरी है। भोजन में हरी सब्जियां, ताजे फल, दालें और पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन शामिल करें। अत्यधिक तला-भुना भोजन, ज्यादा चीनी और शराब के सेवन से बचें, क्योंकि ये लिवर पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। नियमित व्यायाम करें, शरीर का वजन नियंत्रित रखें और बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी दवा या सप्लीमेंट का सेवन न करें।

नियमित जांच क्यों है जरूरी?

विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों में हेपेटाइटिस-बी का जोखिम अधिक है, उनके लिए समय-समय पर जांच कराना बेहद महत्वपूर्ण है। शुरुआती अवस्था में संक्रमण की पहचान होने पर उचित उपचार और निगरानी के जरिए लिवर को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है।

 

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