पीएम मोदी, पुतिन और जिनपिंग एक मंच पर, SCO सम्मेलन में भारत के लिए क्यों अहम है ये बैठक?

बिश्केक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उज्बेकिस्तान का दौरा पूरा करने के बाद किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंच गए हैं। वह यहां 26वें शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस सम्मेलन में भारत, रूस, चीन और पाकिस्तान समेत 10 सदस्य देशों के नेता शामिल होंगे। खास बात यह है कि प्रधानमंत्री मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक ही मंच पर नजर आएंगे। संगठन की स्थापना के 25 साल पूरे होने की वजह से भी इस बार का सम्मेलन खास माना जा रहा है।

हवाई अड्डे पर किर्गिस्तान के मंत्रिपरिषद के अध्यक्ष आदिलबेक कासिमालिएव ने प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान पारंपरिक किर्गिज नृत्य की प्रस्तुति भी हुई। बिश्केक पहुंचने के बाद होटल में भारतीय समुदाय के लोगों ने भी प्रधानमंत्री का भव्य स्वागत किया।

पुतिन के साथ आज हो सकती है पीएम मोदी की मुलाकात

प्रधानमंत्री मोदी किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर झापारोव के निमंत्रण पर 31 अगस्त से 1 सितंबर तक होने वाले शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। बैठक में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान और ईरान समेत 10 सदस्य देशों के नेता शामिल होंगे। इस बार सम्मेलन की थीम ‘सतत शांति, विकास और समृद्धि के लिए साथ मिलकर आगे बढ़ना’ है। सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और दूसरे नेताओं के साथ द्विपक्षीय बातचीत होने की संभावना है। पुतिन के साथ उनकी बैठक आज होने की उम्मीद है।

SCO के 25 साल पूरे, जानें कैसे बना संगठन

शंघाई सहयोग संगठन के 25 साल पूरे हो रहे हैं। चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने वर्ष 2001 में मिलकर इस संगठन की स्थापना की थी। इसके बाद वर्ष 2017 में भारत और पाकिस्तान इसके पूर्ण सदस्य बने। वर्ष 2023 में ईरान और 2024 में बेलारूस भी संगठन में शामिल हो गए। प्रधानमंत्री मोदी सम्मेलन से इतर सदस्य देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें कर सकते हैं। इनमें किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर झापारोव और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मुलाकात अहम मानी जा रही है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मध्य एशिया

मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और कई महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों के लिहाज से बेहद अहम क्षेत्र है। भारत लंबे समय से इस क्षेत्र के देशों के साथ अपने संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ भारत मध्य एशियाई देशों के साथ व्यापार और सहयोग बढ़ाना चाहता है। इसके लिए नए व्यापारिक संबंधों के साथ परिवहन मार्ग विकसित करने पर भी काम किया जा रहा है।

सुरक्षा और आतंकवाद पर भारत का जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने मध्य एशियाई देशों की यात्रा पर रवाना होने से पहले कहा था कि इस क्षेत्र के लिए भारत का दृष्टिकोण सुरक्षा, संपर्क और अवसरों पर आधारित है। उन्होंने आतंकवाद, अलगाववाद और चरमपंथ के खतरे से मुक्त क्षेत्र बनाने के लिए साथी देशों के साथ मिलकर काम करने की इच्छा भी जताई थी।

प्रधानमंत्री मोदी किर्गिस्तान में छठे विश्व घुमंतू खेलों के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। उन्होंने कहा है कि उनकी इस यात्रा से मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक साझेदारी मजबूत होगी। साथ ही क्षेत्र के साथ सभ्यतागत संबंध और गहरे होंगे तथा शांति, स्थिरता और समृद्धि के साझा प्रयासों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी उज्बेकिस्तान के दौरे पर थे। वहां उन्होंने राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। बातचीत के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच व्यापार के साथ दोनों देशों की समान सोच और आकांक्षाओं पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने कहा कि उज्बेकिस्तान की यह उनकी चौथी यात्रा है, जो दोनों देशों के करीबी संबंधों, बेहतर समन्वय और गहरी मित्रता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान की सोच और आकांक्षाओं में गहरी समानता है।

 

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