मुंबई: भारतीय नौसेना की ताकत में सोमवार को एक और अहम इजाफा होने जा रहा है। गहरे समुद्र में जटिल सैन्य और राहत अभियानों को अंजाम देने में सक्षम आईएनएस निपुण को आज मुंबई के नौसेना गोदी में औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल किया जाएगा। यह पोत समुद्र की गहराई में फंसी पनडुब्बी और नौसैनिकों को बचाने के साथ-साथ पानी के भीतर खराब उपकरणों की मरम्मत, मलबे की खोज और निगरानी जैसे मुश्किल अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है। करीब 75 प्रतिशत स्वदेशी हिस्सों से तैयार आईएनएस निपुण को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
गहरे समुद्र में शुरू होगी निपुण की असली भूमिका
आईएनएस निपुण सामान्य युद्धपोतों से अलग भूमिका के लिए तैयार किया गया है। इसकी सबसे बड़ी क्षमता समुद्र की सतह के नीचे होने वाले अभियानों में है। गहरे पानी में गोताखोरी, पनडुब्बी बचाव, समुद्र के भीतर निगरानी और मलबा हटाने जैसे कठिन कार्य इसके प्रमुख दायित्वों में शामिल होंगे। जिन परिस्थितियों में सामान्य जहाजों की पहुंच सीमित हो जाती है, वहां आईएनएस निपुण नौसेना के लिए अहम भूमिका निभाएगा।
पनडुब्बी और नौसैनिकों को बचाने में सक्षम
समुद्र की गहराई में किसी पनडुब्बी के फंस जाने या नौसैनिकों के संकट में पड़ने की स्थिति में आईएनएस निपुण बचाव अभियान चला सकता है। इसे गहरे समुद्र में बचाव करने वाले पोत के लिए मदर शिप की भूमिका निभाने के लिहाज से तैयार किया गया है। अत्याधुनिक गोताखोरी प्रणालियों की मदद से यह लंबे समय तक गहराई में सुरक्षित रहकर अभियान चला सकता है।
समुद्र के अंदर खराब मशीन की भी होगी मरम्मत
आईएनएस निपुण की क्षमता केवल बचाव अभियानों तक सीमित नहीं है। यह समुद्र की सतह के नीचे खराब हो चुके जहाज या मशीन की मरम्मत करने में भी सक्षम है। इसके अलावा समुद्र में डूबे या खोए उपकरणों और मलबे की खोज कर उन्हें बाहर निकालने का काम भी किया जा सकता है।
रिमोट रोबोट से लेकर निगरानी तक की क्षमता
पोत में पानी के भीतर चलने वाले दूर से नियंत्रित रोबोट भी मौजूद हैं। इनके जरिए समुद्र की ज्यादा गहराई वाले क्षेत्रों में खोजबीन और निगरानी की जा सकती है। आईएनएस निपुण गहराई में महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाने में भी सक्षम है, जिससे नौसेना को समुद्र के भीतर चल रहे अभियानों के दौरान बेहतर जानकारी मिल सकेगी।
खराब मौसम में भी अपनी जगह स्थिर रखेगा
आईएनएस निपुण को आधुनिक गतिशील स्थिति निर्धारण प्रणाली से लैस किया गया है। इसकी मदद से समुद्र में तेज लहरों और खराब मौसम के दौरान भी पोत अपनी स्थिति को स्थिर बनाए रख सकता है। गहरे समुद्र में बचाव या मरम्मत जैसे अभियानों के दौरान यह क्षमता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
75 फीसदी से ज्यादा हिस्सा स्वदेशी
आईएनएस निपुण का करीब 75 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह स्वदेशी है। इसके निर्माण में भारतीय उद्योगों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों का बड़ा योगदान रहा है। स्वदेशी तकनीक और उपकरणों के इस्तेमाल से गहरे समुद्र से जुड़े महत्वपूर्ण अभियानों में विदेशी निर्भरता कम करने की दिशा में इसे अहम कदम माना जा रहा है।
नौसेना में लगातार बढ़ रही समुद्री क्षमता
आईएनएस निपुण से पहले जुलाई में भारतीय नौसेना ने पनडुब्बी रोधी युद्धक क्षमता में विशेषज्ञता रखने वाले मालवन को भी अपने बेड़े में शामिल किया था। अब आईएनएस निपुण के शामिल होने से समुद्र के भीतर बचाव, निगरानी, मरम्मत और गहरे समुद्री अभियानों को लेकर नौसेना की क्षमता और मजबूत होगी।
