लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मानसून के सक्रिय होते ही मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। भीषण गर्मी और उमस से जूझ रहे लोगों को अब राहत मिलनी शुरू हो गई है। प्रदेश के कई हिस्सों में गुरुवार को हुई बारिश के बाद शुक्रवार को भी मौसम विभाग ने 45 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई है। इसके लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगले चार से पांच दिनों तक प्रदेश में मौसम सुहाना बना रह सकता है।
मानसून की दस्तक के बाद प्रदेश में लंबे समय से बनी गर्मी की स्थिति कमजोर पड़ गई है। खासकर बांदा जैसे जिले, जो इस वर्ष लगातार सबसे अधिक गर्म रहने वाले इलाकों में शामिल रहे, वहां भी लोगों को राहत महसूस हो रही है। बारिश ने किसानों के साथ-साथ आम लोगों के चेहरों पर भी मुस्कान लौटा दी है।
इन जिलों में बारिश और तेज हवाओं की संभावना
मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार को सोनभद्र, चित्रकूट, प्रतापगढ़, बांदा, कौशांबी, प्रयागराज, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, जौनपुर, भदोही, गाजीपुर, फर्रुखाबाद, कानपुर, रायबरेली, ललितपुर, महोबा, झांसी, सहारनपुर, बिजनौर, शामली, बागपत, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, मेरठ, हापुड़, गौतमबुद्धनगर, हाथरस, आगरा, कासगंज, एटा, मैनपुरी, फिरोजाबाद, इटावा और औरैया समेत कुल 45 जिलों में बारिश के आसार हैं। इन क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बादलों की गर्जना और बिजली चमकने की भी संभावना जताई गई है।
10 दिन देरी से पहुंचा मानसून, अब दिखा असर
इस बार प्रदेश में मानसून सामान्य समय से लगभग 10 दिन की देरी से पहुंचा। हालांकि इसके सक्रिय होते ही सूखे जैसे हालात तेजी से बदलने लगे हैं। जहां कुछ दिन पहले तक तेज धूप और लू लोगों को परेशान कर रही थी, वहीं अब कई जिलों में रिमझिम से लेकर झमाझम बारिश का दौर देखने को मिल रहा है।
गुरुवार को रामपुर, बदायूं और आसपास के कई इलाकों में अच्छी बारिश दर्ज की गई, जिससे तापमान में गिरावट आई और मौसम सुहावना हो गया।
राजधानी लखनऊ में भी बदला मौसम
राजधानी लखनऊ में भी मौसम का असर देखने को मिला। गुरुवार के बाद शुक्रवार सुबह कई इलाकों में हल्की बूंदाबांदी हुई। सुबह के समय आसमान में बादल छाए रहे, हालांकि बाद में धूप निकल आई। मौसम विभाग का कहना है कि राजधानी को अभी मानसून की पहली तेज बारिश का इंतजार है।
मैदानी इलाकों में राहत, पहाड़ों पर बढ़ी चिंता
जहां उत्तर प्रदेश समेत मैदानी क्षेत्रों में बारिश राहत लेकर आई है, वहीं पहाड़ी राज्यों में यह मुसीबत का कारण बन रही है। लगातार बारिश के चलते कई नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है। उत्तराखंड और अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा भी बढ़ गया है, जिससे प्रशासन सतर्क हो गया है।
