SIR पर आज सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, तय होगा चुनाव आयोग के अधिकारों का दायरा

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नई दिल्ली: चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े बेहद अहम मामले में आज सुप्रीम कोर्ट बड़ा फैसला सुनाने जा रहा है। सवाल यह है कि क्या चुनाव आयोग के पास विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR कराने का संवैधानिक अधिकार है या नहीं। इस मामले पर देश की सर्वोच्च अदालत आज अपना निर्णय सुनाएगी, जिस पर कई राज्यों की चुनावी प्रक्रिया और लाखों मतदाताओं की नजर टिकी हुई है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ इस मामले में दाखिल याचिकाओं के समूह पर फैसला सुनाएगी। अदालत यह तय करेगी कि संविधान के अनुच्छेद 326, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और उससे जुड़े नियमों के तहत चुनाव आयोग को मौजूदा स्वरूप में SIR कराने की शक्ति प्राप्त है या नहीं।

29 जनवरी को सुरक्षित रख लिया गया था फैसला

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी को सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। हालांकि तब से अब तक अदालत ने SIR प्रक्रिया पर किसी तरह की रोक नहीं लगाई थी।

इसी दौरान बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में SIR प्रक्रिया पूरी भी हो चुकी है। वहीं उत्तर प्रदेश, गुजरात और राजस्थान समेत कई राज्यों में यह प्रक्रिया अब भी जारी बताई जा रही है।

कई बड़े नेताओं और संगठनों ने दी है चुनौती

इस मामले को लेकर दाखिल याचिकाओं में कई राजनीतिक दलों के सांसद और सामाजिक संगठन शामिल हैं। इनमें एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा, आरजेडी सांसद मनोज झा, कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल और एनसीपी (एसपी) सांसद सुप्रिया सुले समेत कई अन्य याचिकाकर्ताओं के नाम शामिल हैं।

ज्यादातर याचिकाएं जून 2025 में बिहार में SIR प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद दाखिल की गई थीं। याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग की शक्तियों और प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाए थे।

आधार कार्ड को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिया था अहम निर्देश

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को एक महत्वपूर्ण निर्देश भी दिया था। अदालत ने कहा था कि आधार कार्ड को पहचान संबंधी दस्तावेजों की सूची में शामिल किया जाए, ताकि संशोधित मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए इसे भी पहचान पत्र के रूप में इस्तेमाल किया जा सके।

हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया था कि आधार कार्ड को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाएगा। साथ ही चुनाव आयोग को यह अधिकार दिया गया था कि वह प्रस्तुत किए गए आधार कार्ड की सत्यता और प्रामाणिकता की जांच कर सके।

देशभर की नजर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर

राजनीतिक और संवैधानिक दृष्टि से इस फैसले को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत का निर्णय न सिर्फ चुनाव आयोग की शक्तियों की सीमा तय करेगा, बल्कि भविष्य में मतदाता सूची पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रियाओं पर भी इसका बड़ा असर पड़ सकता है।

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