मुंबई पर जलसंकट का साया: झीलों में बचा सिर्फ 10-12% पानी, CM फडणवीस ने बुलाई आपात बैठक

मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में जलसंकट गहराता जा रहा है। मानसून की देरी ने महानगर की चिंता बढ़ा दी है। मुंबई और आसपास के क्षेत्रों को पानी उपलब्ध कराने वाली सात प्रमुख झीलों का जलस्तर घटकर महज 10 से 12 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जिससे प्रशासन की चिंताएं बढ़ गई हैं।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आपातकालीन समीक्षा बैठक बुलाई और अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी परिस्थिति में मुंबई तथा मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में अगस्त 2027 तक पेयजल आपूर्ति प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसके लिए दीर्घकालिक और प्रभावी योजना तैयार करने को कहा गया है।

सात झीलों पर टिकी है मुंबई की प्यास

करीब दो करोड़ आबादी वाले मुंबई महानगर की जलापूर्ति मुख्य रूप से अपर वैतरणा, मोदक सागर, तानसा, मध्य वैतरणा, भातसा, विहार और तुलसी झीलों पर निर्भर है। वर्तमान में इन जलाशयों में उपलब्ध उपयोगी जल भंडार क्षमता की तुलना में बेहद कम रह गया है, जिससे भविष्य को लेकर आशंकाएं बढ़ गई हैं।

पूरे शहर में लागू हुई 10 फीसदी पानी कटौती

जल भंडारण में लगातार गिरावट को देखते हुए बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) पहले ही शहर में 10 प्रतिशत पानी कटौती लागू कर चुका है। इसका असर केवल आम बस्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि वर्ली और मलाबार हिल जैसे प्रतिष्ठित इलाकों में भी पानी की कमी महसूस की जा रही है।

कमजोर मानसून की आशंका ने बढ़ाई परेशानी

जलग्रहण क्षेत्रों में अपेक्षित बारिश नहीं होने से प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अल-नीनो के संभावित प्रभाव और कमजोर मानसून की आशंका को ध्यान में रखते हुए केवल वर्तमान वर्ष ही नहीं, बल्कि अगस्त 2027 तक की जल जरूरतों की रणनीति तैयार की जाए।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि उपलब्ध जल संसाधनों का प्राथमिक उपयोग पेयजल आपूर्ति के लिए किया जाएगा। सिंचाई और अन्य गैर-आवश्यक कार्यों में पानी के उपयोग पर सख्त नियंत्रण रखा जाएगा।

पुराने कुओं और बावड़ियों को फिर से किया जाएगा सक्रिय

जलसंकट से निपटने के लिए प्रशासन अब पारंपरिक जल स्रोतों की ओर भी ध्यान दे रहा है। मुंबई, नवी मुंबई और ठाणे क्षेत्र में स्थित पुराने कुओं और बावड़ियों को पुनर्जीवित करने का अभियान शुरू किया गया है।

बीएमसी ने अपने अधिकार क्षेत्र में मौजूद करीब 350 पुराने खुले कुओं और बावड़ियों की सफाई, गाद निकासी और जल शुद्धिकरण की योजना तैयार की है। इन स्रोतों के पानी का उपयोग सफाई, बागवानी और अन्य गैर-पेयजल कार्यों में किया जाएगा ताकि झीलों के पानी पर दबाव कम हो सके।

ठाणे और नवी मुंबई में भी शुरू हुई तैयारी

ठाणे और नवी मुंबई नगर निगमों ने भी भूजल स्तर सुधारने और स्थानीय जल स्रोतों को सक्रिय करने के लिए वार्ड स्तर पर विशेष टीमें गठित की हैं। प्रशासन का मानना है कि मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने तक ये पारंपरिक जल स्रोत राहत देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

नागरिकों से पानी बचाने की अपील

बढ़ते जलसंकट को देखते हुए राज्य सरकार और बीएमसी ने नागरिकों से पानी का सीमित और जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग करने की अपील की है। अधिकारियों का मानना है कि यदि मानसून में और देरी होती है तो जल संरक्षण ही संकट से निपटने का सबसे प्रभावी उपाय साबित होगा।

 

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