नई दिल्ली |राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने देश की युवा पीढ़ी का आह्वान करते हुए कहा है कि स्वतंत्रता का अर्थ व्यक्तिगत स्वेच्छाचारिता नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति दायित्वबोध है। उन्होंने युवाओं से व्यक्तिगत प्राथमिकताओं से ऊपर उठकर देशहित को प्राथमिकता देने और एक सशक्त भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देने की अपील की।डोभाल शनिवार को ‘लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार’ प्राप्त करने के बाद आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे।
ऐतिहासिक अवसर को गंवाने से बचें युवा
समारोह में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए डोभाल ने रेखांकित किया कि भारत इस समय अपने विकास यात्रा के एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण कालखंड से गुज़र रहा है।
राष्ट्रहित को प्राथमिकता: युवाओं को अल्पकालिक और संकीर्ण निजी स्वार्थों को त्यागकर देश निर्माण के संकल्प पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
ऐतिहासिक मोड़: भारत के पास इस समय वैश्विक मंच पर अपनी छाप छोड़ने का एक अभूतपूर्व अवसर है, जिसे व्यर्थ नहीं गँवाया जाना चाहिए।
नेतृत्व पर विश्वास: उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व की सराहना करते हुए भरोसा जताया कि देश अपनी विकास यात्रा में एक नया अध्याय लिखेगा।
लोकमान्य तिलक के त्याग का स्मरण
स्वतंत्रता संग्राम में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के योगदान और उनके अदम्य साहस को याद करते हुए NSA डोभाल ने कहा कि आज की पीढ़ी को यह समझना होगा कि स्वतंत्रता अनायास ही नहीं मिली है।
उन्होंने पुणे में फैले प्लेग के ऐतिहासिक प्रकरण का उल्लेख करते हुए बताया कि पुत्र को खो देने के व्यक्तिगत दुख के बावजूद लोकमान्य तिलक ने समाज और देश के प्रति अपने दायित्वों से मुंह नहीं मोड़ा। तिलक ने देशवासियों को अपनी आवाज़ बुलंद करने की शक्ति और नई ‘चेतना’ प्रदान की थी।
गृह मंत्री ने सौंपा सम्मान
उल्लेखनीय है कि तिलक स्मारक ट्रस्ट की ओर से आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अजीत डोभाल को ‘लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार’ से सम्मानित किया। NSA डोभाल ने अपने संबोधन के अंत में विश्वास जताया कि भारत का भावी परिदृश्य उज्ज्वल है और देश अपने निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने में निश्चित रूप से सफल होगा।
