नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट: एक तरफ संसद परिसर में भारी राजनीतिक घमासान और जोरदार नारेबाजी का दौर चल रहा था, वहीं दूसरी ओर सत्ता के गलियारों में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और गोपनीय रणनीति को अंतिम रूप दिया जा रहा था। एंटी-पेपर लीक बिल पर हो रही बहसों और सदन के हंगामे के ठीक बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल की संसद में अचानक हुई मौजूदगी ने देश के रणनीतिक और सुरक्षा विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
बाहर से बेहद साधारण प्रतीत होने वाली इस गतिविधि के पीछे एक बड़े सुरक्षा ऑपरेशन और प्रशासनिक समन्वय के संकेत मिल रहे हैं।
बंद दरवाजों के पीछे 40 मिनट की अहम वार्ता
सूत्रों के अनुसार, जंतर-मंतर पर हुए हालिया विरोध-प्रदर्शनों और उसके बाद उपजी स्थिति के मद्देनजर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कक्ष में एक उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक आयोजित की गई। लगभग 40 मिनट तक चली इस बैठक में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के शीर्ष अधिकारियों, गृह सचिव और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के महानिदेशकों (DGs) ने हिस्सा लिया।
इसके बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल जैसे प्रमुख केंद्रीय मंत्रियों की उपस्थिति में भी एक महत्वपूर्ण चर्चा हुई।
खुफिया तंत्र और दिल्ली सुरक्षा का नया ढांचा
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि देश की शिक्षा प्रणाली में पेपर लीक जैसे मामलों को अब केवल प्रशासनिक विफलता के रूप में नहीं, बल्कि आंतरिक सुरक्षा की गंभीर चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। युवाओं में असंतोष फैलाकर माहौल बिगाड़ने की आशंकाओं को देखते हुए कड़े कानूनों को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
हाल ही में दिल्ली पुलिस के शीर्ष नेतृत्व में इंटेलिजेंस बैकग्राउंड वाले अधिकारी की नियुक्ति को भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, ताकि राजधानी की सुरक्षा और खुफिया इनपुट्स के समन्वय को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।
डिजिटल स्पेस और विदेशी फंडिंग पर नजर
जांच एजेंसियों और दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा (IFSO) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को लेकर अपनी निगरानी बढ़ा दी है। खुफिया इनपुट्स के अनुसार, भ्रामक जानकारियों और ऑनलाइन अभियानों के पीछे संभावित विदेशी फंडिंग और संगठित नेटवर्क की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
दूसरी ओर, विरोध-प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुँचाने वाले असामाजिक तत्वों पर सख्त कानूनी कार्रवाई के लिए प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह मुस्तैद नज़र आ रहा है।
