यूएन मुख्यालय के बाहर तिब्बती युवक का आत्मदाह! ‘आजाद तिब्बत’ की मांग को लेकर दी जान, फिर गरमाया आंदोलन

न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर गुरुवार शाम एक दर्दनाक घटना ने दुनिया का ध्यान तिब्बत मुद्दे की ओर खींच लिया। ‘आजाद तिब्बत’ की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे 42 वर्षीय तिब्बती युवक लोब्गा रंगजेन ने कथित रूप से आत्मदाह कर लिया। गंभीर रूप से झुलसे रंगजेन को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

यूएन मुख्यालय के बाहर किया विरोध प्रदर्शन

जानकारी के अनुसार, घटना न्यूयॉर्क के मैनहट्टन क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के निकट हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक लोब्गा रंगजेन तिब्बती झंडा लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने खुद को आग लगा ली, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

राहत प्रयासों के बावजूद नहीं बची जान

घटना के तुरंत बाद आसपास मौजूद आपातकालीन कर्मियों ने आग बुझाने का प्रयास किया। फायर एक्सटिंग्विशर की मदद से आग पर काबू पाया गया और घायल अवस्था में रंगजेन को अस्पताल ले जाया गया। हालांकि गंभीर रूप से झुलसने के कारण उनकी जान नहीं बच सकी।

पुलिस ने शुरू की जांच

घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके को घेर लिया और जांच शुरू कर दी। अधिकारियों ने घटनास्थल से कुछ सामग्री भी जब्त की है। मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

‘चीन तिब्बत छोड़ो’ संदेश ने खींचा ध्यान

रिपोर्टों के अनुसार, घटनास्थल के आसपास ऐसे संदेश और नारे दिखाई दिए जो तिब्बती स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े बताए जा रहे हैं। लंबे समय से तिब्बत की राजनीतिक स्थिति और मानवाधिकारों को लेकर विभिन्न संगठनों द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाज उठाई जाती रही है।

17 वर्षों में 150 से अधिक आत्मदाह के दावे

तिब्बत समर्थक संगठनों का दावा है कि वर्ष 2009 से अब तक चीन के नियंत्रण के विरोध में 150 से अधिक लोगों ने आत्मदाह किया है। इन घटनाओं को तिब्बती पहचान, धार्मिक स्वतंत्रता और राजनीतिक अधिकारों से जुड़ी मांगों के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

तिब्बत मुद्दा फिर चर्चा में

इस घटना के बाद तिब्बत का मुद्दा एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आ गया है। तिब्बती संगठनों का कहना है कि वे सांस्कृतिक, धार्मिक और राजनीतिक अधिकारों की मांग उठाते रहे हैं, जबकि चीन तिब्बत को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है।

लंबे समय से विवाद का केंद्र है तिब्बत

तिब्बत की राजनीतिक स्थिति को लेकर दशकों से मतभेद बने हुए हैं। वर्ष 1951 के बाद से इस क्षेत्र की प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक नियंत्रण को लेकर विभिन्न पक्षों के बीच अलग-अलग दावे और दृष्टिकोण सामने आते रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर समय-समय पर विरोध प्रदर्शन और अभियान भी चलाए जाते रहे हैं।

 

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