योगी कैबिनेट विस्तार की सुगबुगाहट तेज, महिला और पिछड़ा चेहरों पर फोकस; कई मंत्रियों की बढ़ी बेचैनी

लखनऊ: पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनाव के बाद अब भारतीय जनता पार्टी का पूरा फोकस उत्तर प्रदेश की राजनीति पर आ गया है। योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर हलचल तेज हो चुकी है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक दिल्ली से अंतिम मंजूरी मिलते ही सात मई के बाद कभी भी कैबिनेट विस्तार हो सकता है। संभावित नामों को लेकर चर्चाएं तेज हैं और संगठन से लेकर सरकार तक बड़े बदलावों के संकेत मिल रहे हैं।

बताया जा रहा है कि इस बार मंत्रिमंडल विस्तार में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को खास प्राथमिकता दी जाएगी। महिलाओं, पिछड़ों और दलित वर्ग के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने पर पार्टी का जोर है। वहीं कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभाग बदलने और कुछ का कद घटने की चर्चाओं ने सत्ता गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।

लखनऊ से दिल्ली तक मंथन लगभग पूरा

सूत्रों के अनुसार योगी मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर लखनऊ और दिल्ली के बीच लंबे समय से मंथन चल रहा था। संभावित मंत्रियों की सूची लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। पार्टी नेतृत्व पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आने का इंतजार कर रहा था, जिसके बाद अब उत्तर प्रदेश पर रणनीतिक फोकस बढ़ गया है।

सात मई को बिहार में संभावित विस्तार और नौ मई को पश्चिम बंगाल में सरकार गठन की चर्चाओं के बीच अब यूपी में नई तारीख को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने की तैयारी

बीजेपी इन दिनों महिला आरक्षण और नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर लगातार अभियान चला रही है। ऐसे में योगी कैबिनेट में महिला चेहरों की संख्या बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।

फतेहपुर से तीन बार विधायक रहीं कृष्णा पासवान का नाम मंत्री पद के लिए प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा है। उनके जरिए महिला प्रतिनिधित्व के साथ दलित और खासतौर पर पासी समाज को साधने की रणनीति देखी जा रही है। माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव 2024 में पासी मतदाताओं की नाराजगी को देखते हुए पार्टी इस वर्ग को फिर से मजबूत संदेश देना चाहती है।

महमूदाबाद से विधायक आशा मौर्य का नाम भी चर्चा में है। वहीं अलीगढ़ की खैर सुरक्षित सीट से विधायक सुरेंद्र दिलेर को भी संभावित मंत्रियों की सूची में बताया जा रहा है। अनूप प्रधान वाल्मीकि के लोकसभा पहुंचने के बाद मंत्रिमंडल में वाल्मीकि समाज का प्रतिनिधित्व कम हुआ है, जिसे संतुलित करने की कोशिश हो सकती है।

ब्राह्मण और ओबीसी समीकरण पर भी नजर

रायबरेली से आने वाले मनोज पांडेय का नाम भी मंत्री पद की दौड़ में बताया जा रहा है। राज्यसभा चुनाव के दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी छोड़कर बीजेपी का दामन थामा था। ब्राह्मण चेहरे के तौर पर पूर्व मंत्री श्रीकांत शर्मा का नाम भी चर्चा में है। हालांकि पार्टी संगठन में भी उनकी भूमिका को लेकर अटकलें हैं।

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी का नाम लगभग तय माना जा रहा है। ओबीसी समीकरण को मजबूत करने के लिए हंसराज विश्वकर्मा का नाम भी चर्चा में है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से आते हैं।

इसके अलावा क्षत्रिय प्रतिनिधित्व के तहत पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह और संतोष सिंह के नाम भी संभावित सूची में शामिल बताए जा रहे हैं।

कुछ मंत्रियों पर गिर सकती है गाज

कैबिनेट विस्तार के साथ-साथ कुछ मंत्रियों को हटाने और कई विभागों में फेरबदल की भी चर्चा है। सूत्रों का कहना है कि कुछ मंत्रियों का प्रभाव कम किया जा सकता है, जबकि कुछ के विभाग बदले जा सकते हैं।

इन अटकलों के बीच कई मंत्रियों की बेचैनी बढ़ गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कुछ मंत्री समर्थन और पैरवी के लिए संघ से जुड़े नेताओं के संपर्क में भी पहुंच गए हैं। वहीं विभाग बदलने की आशंका के चलते कुछ मंत्री तेजी से अपने विभागों का बजट और लंबित काम निपटाने में जुट गए हैं।

फिलहाल बीजेपी नेतृत्व अंतिम रणनीति तैयार करने में लगा है और माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में योगी सरकार के नए चेहरे और नए समीकरण सामने आ सकते हैं।

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