लखनऊ। उत्तर प्रदेश की चर्चित IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने करीब 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अपने इस्तीफे के साथ जारी किए गए भावुक संदेश में दिव्या मित्तल ने अपने प्रशासनिक सफर, संघर्ष, जनता से मिले प्रेम और खास तौर पर मिर्जापुर से जुड़े अनुभवों का विस्तार से जिक्र किया है।
दिव्या मित्तल का इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब उनके अगले कदम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या प्रशासनिक सेवा से विदाई के बाद दिव्या मित्तल सक्रिय राजनीति का रुख कर सकती हैं? हालांकि, उन्होंने अपने इस्तीफे में चुनाव लड़ने या किसी राजनीतिक दल में शामिल होने की कोई घोषणा नहीं की है।
इस्तीफे में मिर्जापुर का बार-बार जिक्र क्यों?
दिव्या मित्तल ने अपने संदेश में अपने प्रशासनिक जीवन के अलग-अलग पड़ावों को अपनी सीख से जोड़ा है। देवरिया को उन्होंने सही के साथ खड़े होने की सीख से जोड़ा, जबकि मिर्जापुर के बारे में उन्होंने लिखा कि यहां उन्हें यह सीख मिली कि “असंभव कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है।”
यही नहीं, उन्होंने मां विंध्यवासिनी का भी उल्लेख किया। उन्होंने लिखा कि मां विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर उन्होंने सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, बल्कि उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है।इस्तीफे के पूरे संदेश में मिर्जापुर का यह भावनात्मक उल्लेख सामान्य प्रशासनिक विदाई संदेश से अलग दिखाई देता है। यही वजह है कि उनके इस्तीफे के बाद एक बार फिर मिर्जापुर से उनके पुराने रिश्ते और उनके अगले कदम को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
लहुरिया दह की वृद्ध महिला का जिक्र सबसे खास
दिव्या मित्तल के इस्तीफे में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला हिस्सा लहुरिया दह की पहाड़ी का है। उन्होंने अपने संदेश में उस गांव की एक वृद्ध महिला का जिक्र किया, जिसने अपने गांव में पहली बार पानी पहुंचते देखा था। दिव्या मित्तल के मुताबिक, वह महिला कुछ नहीं बोली और सिर्फ कांपते हाथों से उनका सिर छूकर आशीर्वाद दे गई।दिव्या मित्तल ने इस घटना को अपनी जिंदगी की ऐसी स्मृति बताया, जिसे पद छूटने के बाद भी वह अपने साथ लेकर जाएंगी।यानी उनके लिए मिर्जापुर सिर्फ एक जिले में की गई पोस्टिंग नहीं, बल्कि ऐसा अनुभव रहा जिसने उनके प्रशासनिक नजरिए और व्यक्तिगत सोच पर गहरी छाप छोड़ी।
क्या इस्तीफे के बाद राजनीति में जाएंगी दिव्या मित्तल
मित्तल के इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हुई है कि वह भविष्य में चुनावी राजनीति में उतर सकती हैं। खासकर मिर्जापुर विधानसभा सीट से उनके चुनाव लड़ने की अटकलें लगाई जा रही हैं।हालांकि, अभी तक दिव्या मित्तल की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है जिसमें उन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की हो।
उनके इस्तीफे का संदेश भी सीधे तौर पर राजनीति की घोषणा नहीं करता। लेकिन उनका यह कहना कि “अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था”, उनके अगले कदम को लेकर अटकलों को जरूर हवा दे रहा है।इसलिए फिलहाल इसे राजनीतिक घोषणा नहीं, बल्कि संभावित राजनीतिक पारी को लेकर चल रही चर्चाओं के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
पुराना मिर्जापुर अध्याय फिर चर्चा में
दिव्या मित्तल का मिर्जापुर कार्यकाल पहले भी सुर्खियों में रहा है। उनके कार्यकाल के दौरान ग्रामीण इलाकों में पेयजल और विकास से जुड़े कामों को लेकर उनकी काफी चर्चा हुई थी।इसी दौरान लहुरिया दह की पहाड़ी के गांव तक पानी पहुंचाने का मामला भी उनके काम से जुड़ी प्रमुख उपलब्धियों में गिना गया। अब इस्तीफे के संदेश में उसी घटना का भावुक जिक्र किए जाने के बाद पुराना मिर्जापुर अध्याय एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
उनके मिर्जापुर कार्यकाल को लेकर उस समय राजनीतिक स्तर पर मतभेदों की खबरें भी सामने आई थीं। केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के साथ उनके कथित मतभेद और बाद में तबादले को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं हुई थीं।
हालांकि, यह दावा कि अनुप्रिया पटेल ने ही दिव्या मित्तल का तबादला करवाया था, आधिकारिक रूप से स्थापित तथ्य नहीं है। इसलिए इस दावे को खबर में आरोप या राजनीतिक चर्चा के रूप में ही रखा जाना चाहिए।
प्रशासनिक सेवा से विदाई, लेकिन सार्वजनिक जीवन से नहीं?
दिव्या मित्तल की कहानी भी सामान्य प्रशासनिक करियर से अलग रही है। IIT दिल्ली और IIM बेंगलुरु से पढ़ाई के बाद उन्होंने लंदन में नौकरी की। इसके बाद देश लौटकर IAS सेवा में आने का फैसला किया।
अपने इस्तीफे में उन्होंने लिखा कि विदेश में नौकरी और सफलता हासिल करने के बावजूद उन्हें अपने देश में न होना खलता था। उन्होंने महसूस किया कि उनकी शिक्षा और आत्मविश्वास पर देश की मिट्टी का कर्ज है और वह कर्ज चुकाना चाहती हैं।
13 साल की सेवा के बाद उनका इस्तीफा अब उनके जीवन के एक अध्याय का अंत है, लेकिन उनके शब्द यह संकेत जरूर देते हैं कि समाज और लोगों के लिए काम करने की उनकी इच्छा खत्म नहीं हुई है।यही वजह है कि उनके इस्तीफे को केवल एक IAS अधिकारी के सेवा से बाहर होने की खबर के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे उनके अगले सार्वजनिक सफर की शुरुआत से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
मिर्जापुर क्यों हो सकता है महत्वपूर्ण?
अगर भविष्य में दिव्या मित्तल राजनीति में आने का फैसला करती हैं, तो मिर्जापुर उनके लिए स्वाभाविक रूप से चर्चा का केंद्र बन सकता है। इसकी वजह उनके कार्यकाल के दौरान बने जनता से संबंध और जिले से जुड़ी उनकी भावनात्मक स्मृतियां हैं।लेकिन फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि उनका राजनीतिक ठिकाना मिर्जापुर ही होगा।
आने वाले दिनों में सबसे अहम यह होगा कि दिव्या मित्तल खुद अपने अगले कदम को लेकर क्या घोषणा करती हैं—क्या वह सामाजिक क्षेत्र में काम करेंगी, किसी राजनीतिक दल से जुड़ेंगी या फिर चुनावी राजनीति में उतरेंगी?
फिलहाल इतना जरूर है कि IAS की कुर्सी छोड़ते समय दिव्या मित्तल ने जिस जगह को सबसे भावुक तरीके से याद किया, वह मिर्जापुर है। और यही मिर्जापुर कनेक्शन अब उनके इस्तीफे की खबर को प्रशासनिक गलियारों से निकालकर राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में ले आया है।
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