तमिलनाडु के राजनीति में TVK एक बड़े दल रूप में उभरी
चेन्नई । दक्षिण भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार विजय, जिन्हें प्रशंसक प्यार से ‘थलपति’ बुलाते हैं, अब पर्दे की लड़ाई छोड़कर असली चुनावी मैदान में उतर चुके हैं। उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) तमिलनाडु की राजनीति में एक नए और शक्तिशाली विकल्प के रूप में उभर रही है। विजय का यह कदम केवल एक फिल्मी सितारे की राजनीति में एंट्री नहीं है, बल्कि यह द्रविड़ राजनीति के दशकों पुराने समीकरणों को चुनौती देने की एक बड़ी कोशिश मानी जा रही है। चार मई के शुरुवाती रुझान में विजय की पार्टी तमिलनाडु में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर रही है।
2026 में ‘किंगमेकर’ नहीं, ‘किंग’ बनने की तैयारी
विजय ने अपनी पार्टी के गठन के साथ ही यह साफ कर दिया था कि उनका मुख्य लक्ष्य 2026 का विधानसभा चुनाव है। राजनीति में आने के लिए उन्होंने अपने चरम पर चल रहे फिल्मी करियर को छोड़ने का फैसला किया, जो उनके इरादों की गंभीरता को दर्शाता है।
मिशन 2026: विजय का लक्ष्य राज्य की सभी 234 सीटों पर मजबूती से लड़ना है। तमिलनाडु में विजय की फैन फॉलोइंग युवाओं और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं (First-time voters) में सबसे ज्यादा है, जो चुनाव का रुख बदलने में सक्षम हैं।
TVK की विचारधारा और मुख्य मुद्दे
विजय की पार्टी की विचारधारा “धर्मनिरपेक्ष सामाजिक न्याय” और “भ्रष्टाचार मुक्त शासन” पर टिकी है। पार्टी के पहले आधिकारिक सम्मेलन (मनाडू) में उन्होंने अपनी नीति के संकेत दिए थे।
द्रविड़ राष्ट्रवाद बनाम तमिल राष्ट्रवाद: विजय एक संतुलित रास्ता अपना रहे हैं, जहाँ वे पेरियार और अंबेडकर के सिद्धांतों के साथ-साथ तमिल गौरव को भी प्राथमिकता दे रहे हैं।
शिक्षा और स्वास्थ्य: वे राज्य की शिक्षा प्रणाली में सुधार और ‘नीट’ (NEET) जैसी परीक्षाओं के विरोध में खड़े दिखे हैं, जो छात्रों के बीच उनकी लोकप्रियता को बढ़ाता है।उनका दावा है कि वे सत्ता को किसी एक परिवार या गुट की जागीर नहीं रहने देंगे।
DMK और AIADMK के लिए कितनी बड़ी चुनौती?
तमिलनाडु में पिछले कई दशकों से सत्ता DMK और AIADMK के बीच घूमती रही है।
द्रमुक (DMK) के लिए खतरा: विजय उसी ‘द्रविड़’ विचारधारा वाले स्पेस में सेंध लगा रहे हैं जिस पर DMK की पकड़ है। उनके आने से युवा वोट बैंक में विभाजन तय माना जा रहा है।
अन्नाद्रमुक (AIADMK) की स्थिति: जयललिता के बाद AIADMK में आए नेतृत्व संकट का फायदा भी विजय उठाना चाहते हैं, ताकि वे खुद को राज्य के अगले बड़े विकल्प के रूप में पेश कर सकें। भले ही विजय की रैलियों में लाखों की भीड़ उमड़ती हो, लेकिन आलोचकों का मानना है कि ‘भीड़ को वोट में बदलना’ सबसे बड़ी चुनौती है।
विजय को बूथ स्तर तक अपना संगठन मजबूत करके चुनावी मैदान में उतरे। कई विश्लेषकों का कहना है कि विजय को जटिल राजनीतिक मुद्दों पर अपनी स्थिति और अधिक स्पष्ट करनी होगी ताकि वे केवल ‘फैन क्लब’ की पार्टी बनकर न रह जाएं। फैन क्लब पार्टी न बनकर तमिलनाडु की राजनीति में बड़े दाल के रूप में उभरे है।
थलपति विजय का राजनीतिक उदय तमिलनाडु में एम.जी. रामचंद्रन (MGR) और जयललिता की विरासत की याद दिलाता है। अगर वे अपनी लोकप्रियता को सही दिशा देने में सफल रहे, तो 2026 का चुनाव तमिलनाडु के इतिहास में एक नया अध्याय लिखेगा।
