भारतीय शेयर बाजार के लिए साल 2026 अब तक उतार-चढ़ाव और दबाव भरा साबित हो रहा है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी एफपीआई का भारतीय इक्विटी बाजार से भरोसा लगातार कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। अप्रैल महीने में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से ₹60,847 करोड़ की बड़ी निकासी की है। वहीं, साल 2026 के शुरुआती चार महीनों में कुल निकासी का आंकड़ा ₹1.92 लाख करोड़ तक पहुंच गया है।
सबसे अहम बात यह है कि यह रकम पूरे साल 2025 में हुई कुल निकासी से भी अधिक बताई जा रही है। लगातार हो रही बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है और बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
फरवरी को छोड़ हर महीने हुई बिकवाली
आंकड़ों पर नजर डालें तो फरवरी को छोड़कर 2026 के लगभग हर महीने विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से पैसा निकाला है।
जनवरी में एफपीआई ने ₹35,962 करोड़ की बिकवाली की थी। फरवरी में कुछ राहत जरूर देखने को मिली और ₹22,615 करोड़ का निवेश आया, लेकिन मार्च में हालात अचानक बिगड़ गए। मार्च महीने में रिकॉर्ड ₹1.17 लाख करोड़ की निकासी दर्ज की गई। अप्रैल में भी बिकवाली का सिलसिला थमा नहीं और विदेशी निवेशकों ने ₹60,847 करोड़ बाहर निकाल लिए।
पश्चिम एशिया तनाव और महंगे कच्चे तेल का असर
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने विदेशी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से वैश्विक महंगाई और ब्याज दरों को लेकर आशंकाएं बढ़ गई हैं। इसका असर उभरते बाजारों पर सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है और भारत भी इससे अछूता नहीं है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, निवेशक फिलहाल सुरक्षित बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं, जिसकी वजह से भारतीय बाजार में दबाव बढ़ा है।
रुपये की कमजोरी ने बढ़ाई चिंता
डॉलर के मुकाबले रुपये में आई कमजोरी भी विदेशी निवेशकों के भरोसे पर असर डाल रही है।
इसके साथ ही भारतीय शेयर बाजार का वैल्यूएशन भी काफी ऊंचा माना जा रहा है। ऐसे में विदेशी निवेशकों को जोखिम ज्यादा नजर आ रहा है और वे मुनाफावसूली करते हुए बाजार से पैसा निकाल रहे हैं।
घरेलू निवेशक बने बाजार का सहारा
हालांकि विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बावजूद घरेलू निवेशकों का निवेश बाजार को संभाले हुए है।
म्यूचुअल फंड और रिटेल निवेशकों की मजबूत भागीदारी की वजह से बाजार में बड़ी गिरावट फिलहाल टली हुई है। हालांकि वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए आने वाले समय में बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की आशंका जताई जा रही है।
क्या फिर लौटेगा विदेशी निवेश?
विश्लेषकों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है, तो विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में वापसी हो सकती है।
फिलहाल निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक संकेतों, अमेरिकी ब्याज दरों और तेल बाजार की चाल पर बनी हुई है।
