महंगाई का नया झटका: 5 किलो वाला ‘छोटू’ गैस सिलेंडर ₹261 महंगा, अब ₹810 में मिलेगा एलपीजी सिलेंडर

मई महीने की शुरुआत आम लोगों के लिए लगातार महंगाई के झटके लेकर आ रही है। पहले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई और अब 5 किलो वाले छोटे गैस सिलेंडर के दाम में भी बड़ा इजाफा कर दिया गया है। इससे निम्न आय वर्ग, मजदूरों, छात्रों और छोटे कारोबारियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

सूत्रों के मुताबिक, 5 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत में एक साथ ₹261 प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई है। नई दरें लागू होने के बाद अब यह सिलेंडर ₹549 की जगह ₹810 में मिलेगा।

छोटे उपभोक्ताओं पर सीधा असर

5 किलो वाले सिलेंडर का इस्तेमाल सबसे ज्यादा वे लोग करते हैं जो किराये के कमरों में रहते हैं या अस्थायी रूप से दूसरे शहरों में काम करते हैं।

दूसरे राज्यों में मजदूरी करने वाले श्रमिक, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र, छोटे दुकानदार और रेहड़ी-पटरी लगाने वाले लोग इसी छोटे सिलेंडर पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में कीमतों में अचानक हुई ₹261 की बढ़ोतरी ने उनके मासिक बजट पर सीधा असर डाला है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर छोटे ढाबों, चाय दुकानों और फास्ट फूड कारोबार पर भी पड़ सकता है।

कमर्शियल सिलेंडर भी हुआ था महंगा

इससे पहले 19 किलो वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में भी ₹993 तक की भारी बढ़ोतरी की गई थी।

नई दरों के बाद दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹2,078.50 से बढ़कर ₹3,071.50 पहुंच गई है। इसका असर होटल, रेस्टोरेंट और फूड कारोबार पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

ईरान संकट के बाद बढ़ा वैश्विक दबाव

एलपीजी की कीमतों में आई इस तेज बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को बड़ी वजह माना जा रहा है।

बताया जा रहा है कि 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई। इसके चलते एलपीजी सप्लाई और कीमतों पर दबाव बढ़ा है।

भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों में इसका असर तेजी से दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहने पर आने वाले समय में महंगाई और बढ़ सकती है।

बढ़ती महंगाई से लोगों की चिंता बढ़ी

गैस सिलेंडर की बढ़ी कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर वे परिवार और मजदूर वर्ग, जो पहले ही बढ़ती महंगाई से जूझ रहे हैं, अब उनके लिए रसोई का खर्च संभालना और मुश्किल हो सकता है।

आर्थिक जानकारों का मानना है कि अगर ऊर्जा कीमतों में जल्द राहत नहीं मिली, तो इसका असर खाने-पीने की वस्तुओं और रोजमर्रा की जरूरतों पर भी दिखाई दे सकता है।

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