94 दिन तक जिंदगी और मौत से जंग… शरीर से बाहर निकली आंतों के साथ जन्मे नवजात को डॉक्टरों ने दिया नया जीवन

मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में डॉक्टरों की टीम ने चिकित्सा क्षेत्र में एक दुर्लभ सफलता हासिल करते हुए गैस्ट्रोस्किसिस जैसी जटिल जन्मजात बीमारी से पीड़ित नवजात को 94 दिनों के अथक इलाज के बाद नया जीवन दिया। जन्म के समय शिशु की आंतें पेट के बाहर थीं और संक्रमण के कारण गंभीर रूप से प्रभावित हो चुकी थीं। लगातार उपचार, तीन जटिल सर्जरी और गहन निगरानी के बाद आखिरकार डॉक्टरों ने नवजात को स्वस्थ कर उसकी मां की गोद में सौंप दिया।

जन्म से पहले ही सामने आ गई थी गंभीर चुनौती

जानकारी के अनुसार, बेंगलुरु निवासी सलादुद्दीन अकील की पत्नी शादमीन तीसरी संतान के जन्म के लिए मुरादाबाद स्थित अपने मायके आई थीं। मार्च के अंतिम सप्ताह में उन्हें तेज पीड़ा हुई और 3 अप्रैल को प्रसव हुआ। नवजात को गैस्ट्रोस्किसिस नामक जटिल जन्मजात बीमारी थी, जिसके कारण उसकी आंतें पेट के बाहर निकली हुई थीं और संक्रमण से बुरी तरह प्रभावित हो चुकी थीं। जन्म के समय बच्चे का वजन मात्र 1.8 किलोग्राम था।

तीन सर्जरी के बाद मिली नई जिंदगी

शिशु की गंभीर हालत को देखते हुए तत्काल पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. वाई.के. पूनिया को बुलाया गया। डॉक्टरों की टीम ने समय-समय पर तीन जटिल सर्जरी की। पहले ऑपरेशन में बाहर निकली आंतों को पेट के भीतर पहुंचाया गया, लेकिन सूजन अधिक होने के कारण स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण बनी रही। 35 दिन बाद बंद आंत को खोलने के लिए दूसरा ऑपरेशन किया गया। लगातार इलाज और निगरानी के बाद जन्म के 94वें दिन तीसरी सर्जरी की गई, जिसके बाद बच्चे की स्थिति में स्थायी सुधार देखने को मिला।

94 दिनों तक चला गहन उपचार

डॉ. पूनिया के अनुसार, यह बीमारी लगभग 2,500 से 3,000 नवजातों में से किसी एक को होती है। नवजात को लंबे समय तक वेंटिलेटर पर रखा गया और नसों के माध्यम से टोटल पैरेंट्रल न्यूट्रिशन (टीपीएन) देकर पोषण उपलब्ध कराया गया, क्योंकि उसकी आंतें सामान्य रूप से भोजन पचाने की स्थिति में नहीं थीं। इस दौरान सोडियम, क्लोराइड और प्लेटलेट्स सहित कई चिकित्सकीय मानकों पर लगातार निगरानी रखी गई।

डॉक्टरों की टीम ने निभाई अहम भूमिका

डॉ. पूनिया ने बताया कि इस तरह के मामलों में केवल सर्जरी ही नहीं, बल्कि नियोनेटोलॉजी विशेषज्ञों और अन्य चिकित्सकों की समर्पित टीम के साथ 24 घंटे गहन देखभाल भी उतनी ही जरूरी होती है। लगातार प्रयासों के बाद बच्चे की आंतों ने सामान्य रूप से काम करना शुरू किया और उसकी हालत स्थिर हो गई।

मां की गोद में लौटी खुशियां

करीब 95 दिनों के लंबे इलाज के बाद नवजात को सुरक्षित उसकी मां की गोद में सौंप दिया गया। परिवार ने बच्चे का नाम यूसुफ रखा है। सलादुद्दीन अकील ने डॉक्टरों की पूरी टीम का आभार जताते हुए डॉ. वाई.के. पूनिया को सम्मान स्वरूप एक शील्ड भेंट की। वहीं, कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज के पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. आर.के. त्रिपाठी ने इस सफल उपचार को अत्यंत दुर्लभ और उल्लेखनीय चिकित्सा उपलब्धि बताया।

 

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