पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की जीत को पार्टी के लिए ऐतिहासिक राजनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है। इस जीत ने न केवल कई चुनावी रिकॉर्ड तोड़े हैं, बल्कि भाजपा के वैचारिक और राजनीतिक विस्तार को भी नई मजबूती दी है। खास बात यह है कि भाजपा ने पहली बार उस पश्चिम बंगाल में सत्ता हासिल की है, जहां जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी का गहरा संबंध रहा था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2014 के बाद से लगातार बंगाल में भाजपा की जीत को पार्टी का बड़ा सपना बताते रहे थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से लेकर भाजपा संगठन तक ने वर्षों तक राज्य में अपनी जमीन मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए। ऐसे में बंगाल की यह जीत भाजपा और संघ परिवार दोनों के लिए बड़ी वैचारिक और राजनीतिक सफलता मानी जा रही है।
‘गंगा एक्सप्रेसवे’ से जोड़कर देखी जा रही बीजेपी की जीत
राजनीतिक गलियारों में भाजपा की इस जीत को ‘गंगा एक्सप्रेसवे’ की तरह भी देखा जा रहा है। इसकी वजह गंगा नदी के प्रवाह वाले प्रमुख राज्यों में भाजपा की मजबूत राजनीतिक मौजूदगी है।
गंगोत्री उत्तराखंड में स्थित है और वहां भाजपा की सरकार है। इसके बाद गंगा हरिद्वार से उत्तर प्रदेश में प्रवेश करती है, जहां 2017 से योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा सत्ता में है। आगे बिहार में भी भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार है। अब गंगासागर वाले पश्चिम बंगाल में भी भाजपा की जीत ने पार्टी की राजनीतिक पकड़ को गंगोत्री से गंगासागर तक जोड़ दिया है।
हालांकि झारखंड के साहिबगंज इलाके से भी गंगा गुजरती है और वहां झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार है, लेकिन व्यापक तौर पर देखें तो गंगा के मुख्य प्रवाह वाले उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में भाजपा की मजबूत सत्ता मौजूद है। इसी वजह से राजनीतिक विश्लेषक इसे भाजपा की सत्ता का ‘गंगा एक्सप्रेसवे’ बता रहे हैं।
पूर्वी भारत में बीजेपी का बढ़ता प्रभाव
पश्चिम बंगाल की जीत ने पूर्वी भारत में भाजपा की स्थिति को और मजबूत कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2019 लोकसभा चुनाव के बाद भी पूर्वी भारत में पार्टी के विस्तार की बात कर चुके थे। उन्होंने तब कहा था कि भाजपा का लक्ष्य ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी मजबूत पकड़ बनाना है।
2024 के लोकसभा चुनाव के साथ हुए ओडिशा विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज की थी। अब पश्चिम बंगाल में जीत के बाद पूर्वी भारत के बड़े राज्यों बिहार, ओडिशा और बंगाल में भाजपा की सत्ता स्थापित हो चुकी है।
राजनीतिक दृष्टि से यह भाजपा के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय तक पूर्वी भारत में पार्टी की उपस्थिति सीमित मानी जाती थी।
उत्तर, पश्चिम और पूर्वोत्तर में भी बीजेपी की मजबूत पकड़
अगर पूरे देश के राजनीतिक नक्शे पर नजर डालें तो भाजपा ने उत्तर, पश्चिम और पूर्वोत्तर भारत में भी अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। पूर्वी भारत में फिलहाल झारखंड ऐसा राज्य है, जहां भाजपा सत्ता में नहीं है।
वहीं पूर्वोत्तर में असम में भाजपा लगातार तीसरी बार सरकार बनाने में सफल रही है। दूसरी ओर पश्चिम भारत के महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा जैसे राज्यों में भी भाजपा की सरकार है।
उत्तर भारत में विपक्ष की स्थिति सीमित होती दिखाई दे रही है। पंजाब, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश जैसे कुछ राज्यों में ही गैर-भाजपा दल सत्ता में हैं।
2024 के बाद फिर मजबूत हुई बीजेपी की राजनीति
2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का आंकड़ा 240 सीटों तक सीमित रहने के बाद विपक्षी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों की ओर से पार्टी के प्रभाव में कमी की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। हालांकि उसके बाद राज्यों में मिली लगातार चुनावी सफलताओं ने भाजपा को फिर से मजबूत राजनीतिक बढ़त दिलाई है।
पश्चिम बंगाल की जीत को इसी सिलसिले की सबसे बड़ी कड़ी माना जा रहा है, जिसने भाजपा को राष्ट्रीय राजनीति में नया आत्मविश्वास दिया है।
