नई दिल्ली । अगर आपको लगता है कि आपने दुनिया के सारे अजूबे जानते हैं, तो शायद आप अभी तक ईल मल्क द्वीप के बारे में नहीं सुना है । एक ऐसा आइलैंड जिसका 12,000 सालों से बाहरी दुनिया से कोई संपर्क नहीं रहा । हम बात कर रहे हैं प्रशांत महासागर के बीच छिपे एक ऐसे रहस्यमयी टापू की, जिसकी झील 50 लाख से भी ज्यादा ऐसे जीव रहते हैं जो पूरी दुनिया में और कहीं नहीं मिलते हैं । वैज्ञानिकों के लिए यह जगह किसी दूसरे ग्रह के अजूबे से कम नहीं है । ईल मल्क एक ऐसा द्वीप जहां 12,000 सालों से पूरी दुनिया से बिल्कुल अलग-थलग है। इस झील को जेलिफिश लेक के नाम से जाना जाता है । यहां गोल्डन जेलिफिश की एक ऐसी प्रजाति पाई जाती है, जो पूरी दुनिया में और कहीं भी मौजूद नहीं है ।
करीब 1.20 लाख साल पहले समुद्र के स्तर में आए बदलाव की वजह से यह झील आसपास के लैगून से कट गई थी, जिसके बाद यहां के जीवों ने एक अनोखे तरीके से खुद को विकसित कर लिया । इस द्वीप की गोल्डन जेलिफिश की सबसे बड़ी खासियत उनका व्यवहार है। कोरल रीफ रिसर्च फाउंडेशन के मुताबिक ये जेलिफिश सूरज की दिशा के साथ माइग्रेट करती हैं। सुबह के समय ये सूरज के साथ पूर्व दिखी की तरफ तैरती हैं ।
जैसे ही सूरज ढलने लगता है ये पश्चिम की तरफ मुड़ जाती हैं । यह प्रक्रिया पानी के अंदर जेलिफिश की एक विशाल जीती-जागती दीवार जैसा नजारा पेश करती है। इन जेलिफिश ने जिंदा रहने के लिए डायनोफ्लैगेलेट्स जो एक प्रकार का शैवाल है, उससे हाथ मिलाया है। ये शैवाल जेलिफिश के ऊतकों में रहते हैं। जब जेलिफिश सूरज की रोशनी में तैरती हैं, तो शैवाल को प्रकाश संश्लेषण के लिए ऊर्जा मिल जाती है और बदले में वे जेलिफिश को भोजन यानी शुगर देते हैं ।
साल 2005 में इस झील में लगभग 3 करोड़ जेलिफिश थीं, लेकिन 2016 में एल नीनो की वजह से बढ़े तापमान के कारण इनकी संख्या काफी कम हो गई । स्थिति इतनी गंभीर थी कि झील को दो साल के लिए बंद करना पड़ा। लेकिन अब फिर एक बार इनकी आबादी फिर से लाखों में पहुंच गई और अब यह पर्यटकों के लिए फिर से खोल दी गई है।
