नई दिल्ली: ओमान तट के पास हुए मिसाइल हमले में जान गंवाने वाले मुंबई के 33 वर्षीय नाविक दीक्षित सोलंकी का शव 35 दिन बाद स्वदेश पहुंचा, लेकिन परिवार ने अंतिम संस्कार से पहले पहचान की पुष्टि के लिए डीएनए जांच की मांग कर दी है। इस घटनाक्रम ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
कार्गो टर्मिनल पर पहुंचा शव, परिवार का इंतजार खत्म
रविवार तड़के मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के कार्गो टर्मिनल पर लकड़ी के बक्से में दीक्षित सोलंकी का शव लाया गया। परिवार के लिए यह 35 दिनों के लंबे और पीड़ादायक इंतजार का अंत था। 1 मार्च को तेल टैंकर एमटी एमकेडी व्योम पर हुए मिसाइल हमले में उनकी मौत हो गई थी, जिसने एक सामान्य समुद्री यात्रा को त्रासदी में बदल दिया।
अंतिम संस्कार से पहले पहचान पर सवाल
शव मिलने के बाद भी परिवार ने अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि पहले डीएनए टेस्ट के जरिए शव की पहचान की पुष्टि की जाए। परिवार के मुताबिक, बिना पुख्ता पहचान के अंतिम संस्कार करना संभव नहीं है।
सामान गायब होने से बढ़ा शक
परिवार की शंका उस समय और गहरी हो गई जब पता चला कि अन्य बचे हुए क्रू सदस्य अपने सामान के साथ लौटे, लेकिन दीक्षित सोलंकी का लैपटॉप, मोबाइल फोन और निजी डायरी गायब हैं। इस कारण परिवार को पूरे घटनाक्रम पर संदेह है।
पिता ने पहले भी जताया था शक
दीक्षित के पिता अमृतलाल सोलंकी ने हादसे के तुरंत बाद ही बेटे की मौत पर संदेह जताया था। उन्होंने कहा था कि जब तक वे अपने बेटे को खुद नहीं देख लेते, तब तक वे उसकी मौत को स्वीकार नहीं करेंगे। अब डीएनए टेस्ट की मांग उसी शक का विस्तार मानी जा रही है।
हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
परिवार ने मामले में पारदर्शिता की मांग करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने शिपिंग कंपनी से पूरी जानकारी साझा करने और चुप्पी तोड़ने की मांग की है।
मोहल्ले में शोक, परिवार को मिल रहा समर्थन
महावीर नगर में रहने वाले दीक्षित सोलंकी को स्थानीय लोग शांत और जिम्मेदार युवक के रूप में याद कर रहे हैं। मां के निधन के बाद वह परिवार की जिम्मेदारी उठाने के लिए दोबारा समुद्र में काम करने गए थे। इस दुख की घड़ी में पूरा इलाका उनके परिवार के साथ खड़ा है।
