नई दिल्ली: अमेरिका में ग्रीन कार्ड हासिल करने का सपना देख रहे हजारों भारतीयों के लिए बड़ा बदलाव हुआ है। अमेरिकी नागरिकता एवं इमिग्रेशन सेवा (USCIS) ने नया पॉलिसी मेमो जारी कर स्पष्ट किया है कि स्टेटस बदलकर ग्रीन कार्ड लेने की प्रक्रिया अब पहले से ज्यादा सख्त तरीके से लागू की जाएगी। नए निर्देशों के अनुसार, कई विदेशी नागरिकों को ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पूरी करने के लिए अमेरिका छोड़कर अपने देश लौटना पड़ सकता है।
इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर भारतीय पेशेवरों, छात्रों और लंबे समय से अमेरिका में रह रहे H-1B वीजा धारकों पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
अब भारत लौटकर करनी पड़ सकती है प्रक्रिया पूरी
USCIS ने अपने नए मेमो में कहा है कि जो विदेशी नागरिक “एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस” के जरिए ग्रीन कार्ड हासिल करना चाहते हैं, उन्हें मौजूदा इमिग्रेशन कानूनों और अदालती फैसलों के तहत विदेश विभाग की कांसुलर प्रोसेसिंग प्रणाली का पालन करना होगा।
इसका मतलब यह है कि कई मामलों में भारतीय आवेदकों को अमेरिका छोड़कर भारत आना होगा और यहीं से ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पूरी करनी होगी। हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में छूट का प्रावधान भी रखा गया है।
हर केस की अलग-अलग होगी जांच
USCIS अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे हर आवेदन का अलग-अलग मूल्यांकन करें और यह तय करें कि किसी व्यक्ति को अमेरिका में रहकर स्टेटस बदलने की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं।
USCIS के प्रवक्ता जैक काहलर ने कहा कि यह कदम इमिग्रेशन सिस्टम को उसके मूल उद्देश्य के अनुसार चलाने के लिए उठाया गया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में अस्थायी रूप से रहने वाले विदेशी नागरिकों को ग्रीन कार्ड के लिए अपने देश से आवेदन करना चाहिए, ताकि कानून का दुरुपयोग रोका जा सके।
H-1B और छात्रों पर सबसे ज्यादा असर संभव
इमिग्रेशन विशेषज्ञों के मुताबिक इस नीति से H-1B वीजा धारकों और F-1 छात्र वीजा पर पढ़ाई कर रहे भारतीयों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। पहले जहां कानूनी स्टेटस बनाए रखने, टैक्स भरने और जरूरी शर्तें पूरी करने पर ग्रीन कार्ड प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान मानी जाती थी, अब अधिकारियों के विवेक की भूमिका बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अब केवल पात्रता पूरी करना पर्याप्त नहीं होगा। आवेदकों को अपने सामाजिक योगदान, करियर उपलब्धियों, टैक्स रिकॉर्ड, पारिवारिक रिश्तों और अमेरिकी समाज में सहभागिता जैसी सकारात्मक बातों को भी मजबूत तरीके से पेश करना पड़ सकता है।
F-1 वीजा वाले छात्रों के लिए बढ़ सकती हैं चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि छात्र वीजा यानी F-1 श्रेणी के लोगों के लिए स्थिति और जटिल हो सकती है। इसका कारण यह है कि F-1 वीजा “डुअल इंटेंट” श्रेणी में नहीं आता। यानी छात्र जब वीजा लेते हैं तो वे पढ़ाई पूरी होने के बाद अपने देश लौटने की मंशा जाहिर करते हैं।
ऐसे में बाद में ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने पर अधिकारियों को यह जांचने का अधिक अधिकार मिल जाएगा कि आवेदक अपने पहले दिए गए बयान पर कितना कायम है।
ग्रीन कार्ड प्रक्रिया अब पहले से ज्यादा कठिन
विशेषज्ञों के मुताबिक अब अमेरिका में रहकर ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करना पहले की तुलना में ज्यादा कठिन और अनिश्चित हो सकता है। खासतौर पर उन भारतीय परिवारों के लिए, जो EB-2 और EB-3 जैसी श्रेणियों में वर्षों से लंबी वेटिंग का सामना कर रहे हैं।
हालांकि विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि जिन लोगों ने अमेरिका में लंबे समय तक कानूनी रूप से रहकर करियर बनाया है, टैक्स भरा है और समाज में सकारात्मक योगदान दिया है, उनके लिए ये बातें आवेदन प्रक्रिया में मददगार साबित हो सकती हैं।
