2 करोड़ फॉलोअर्स, लेकिन जंतर-मंतर पर सीमित भीड़! ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के पहले जमीनी प्रदर्शन ने खड़े किए कई सवाल

नई दिल्ली: सोशल मीडिया की ताकत और जमीनी राजनीति के बीच का अंतर शनिवार को एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया। इंस्टाग्राम पर 2 करोड़ से अधिक फॉलोअर्स का दावा करने वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपना पहला बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया, लेकिन डिजिटल दुनिया में दिखाई देने वाले विशाल समर्थन के मुकाबले धरना स्थल पर अपेक्षाकृत सीमित संख्या में लोग पहुंचे।

प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा नीट-यूजी 2026 पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी में सुधार की मांग था। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग उठाई।

सोशल मीडिया अभियान से शुरू हुआ आंदोलन

इस अभियान की शुरुआत मई 2026 में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हुई थी। कुछ ही दिनों में यह पहल युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो गई और इंस्टाग्राम पर इसके फॉलोअर्स की संख्या 2 करोड़ के पार पहुंच गई। शिक्षा व्यवस्था और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर असंतोष जाहिर कर रहे बड़ी संख्या में युवाओं ने इस डिजिटल अभियान का समर्थन किया।

जंतर-मंतर पर दिखा अनोखा विरोध प्रदर्शन

प्रदर्शन में शामिल कई युवाओं ने कॉकरोच के मुखौटे पहन रखे थे। उनके हाथों में तिरंगा, किताबें और विभिन्न मांगों से जुड़े पोस्टर दिखाई दिए। प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें उठाईं और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग की।

अमेरिका से लौटे संस्थापक, मंच से किया संबोधन

आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए इसके संस्थापक अभिजीत डिपके विशेष रूप से अमेरिका से भारत पहुंचे। जंतर-मंतर पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने युवाओं से अपने अधिकारों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए आवाज उठाने का आह्वान किया।

सोनम वांगचुक समेत कई संगठनों का समर्थन

प्रदर्शन को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का समर्थन भी मिला। इसके अलावा विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने भी आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त किया। इससे आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर अतिरिक्त चर्चा मिली।

फॉलोअर्स और भीड़ के अंतर पर छिड़ी बहस

प्रदर्शन के बाद सबसे अधिक चर्चा सोशल मीडिया पर दिखने वाले समर्थन और वास्तविक भीड़ के बीच अंतर को लेकर हुई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किसी अभियान को समर्थन देना अपेक्षाकृत आसान होता है, जबकि लोगों को सड़कों पर उतरकर आंदोलन में शामिल करना कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण होता है।

हालांकि समर्थकों का तर्क है कि किसी आंदोलन की सफलता केवल भीड़ के आकार से नहीं, बल्कि उसके द्वारा उठाए गए मुद्दों और समाज में पैदा हुई बहस से भी आंकी जाती है।

फॉलोअर्स को लेकर भी जारी है विवाद

कॉकरोच जनता पार्टी के सोशल मीडिया आंकड़ों को लेकर भी बहस जारी है। कुछ राजनीतिक नेताओं ने फॉलोअर्स की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए हैं, जबकि संगठन का दावा है कि उसके अधिकांश फॉलोअर्स भारत से हैं। इस संबंध में अलग-अलग दावे सामने आए हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

 

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