देहरादून: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कांग्रेस में अपने सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देकर बड़ा राजनीतिक कदम उठाया है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब उनके सहयोगी और पूर्व ओएसडी चंदन सिंह जीना के ठिकाने से बड़ी मात्रा में नकदी और सोना बरामद होने की खबर सामने आई है। रावत ने सोशल मीडिया पर लंबी पोस्ट के जरिए इस्तीफे की वजह बताई और कहा कि मामले की सच्चाई जल्द सामने आ जाएगी।
रावत ने कहा कि टीवी चैनलों पर उनके सहयोगी के घर से बड़ी मात्रा में नकदी और आभूषण मिलने की खबरें चल रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चंदन सिंह जीना उनके ओएसडी रह चुके हैं। अगर उनके खिलाफ ओएमआर शीट से छेड़छाड़ या ग्राम सेवक भर्ती परीक्षा में किसी तरह की गड़बड़ी के सबूत सामने आते हैं, तो यह उनके लिए बेहद शर्मिंदगी की बात होगी। हालांकि उन्होंने जीना पर लगे आरोपों पर भरोसा नहीं होने की बात भी कही।
पार्टी के संघर्ष को कमजोर नहीं करना चाहते रावत
हरीश रावत ने अपनी पोस्ट में कहा कि उत्तराखंड का आगामी चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि पहले जब उनसे चुनाव की तारीख को लेकर सवाल किया जाता था तो वह मजाक में कहते थे कि चुनाव तब होंगे, जब सीबीआई उनके दरवाजे पर दस्तक देगी। इस बार उनके घर के बजाय उनके एक सहयोगी के घर पर कार्रवाई के जरिए एक अलग राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश की गई है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी और उसके कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। राहुल गांधी भी राष्ट्रीय स्तर पर ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के जरिए शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। ऐसे समय में अगर उनके किसी भी कृत्य से पार्टी के संघर्ष को नुकसान या कमजोरी पहुंचती है तो वह ऐसा नहीं चाहते।
प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के दोनों पद छोड़े
रावत ने कहा कि उन्होंने अपने ईष्ट देवता का स्मरण करने के बाद यह फैसला लिया है। उन्होंने बताया कि वह किसी सरकारी पद पर नहीं हैं, लेकिन उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य हैं। उन्होंने पार्टी के हित में इन दोनों पदों से हटने का निर्णय लिया है।
उनका कहना है कि उनकी वजह से कांग्रेस के संघर्ष में किसी तरह की कमजोरी नहीं आनी चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने दोनों पदों से इस्तीफा देने का फैसला किया।
भर्ती प्रक्रिया पर भी रावत ने रखी अपनी बात
अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से जुड़े मामले पर रावत ने अपने कार्यकाल का बचाव किया। उन्होंने कहा कि आयोग का गठन राज्य के युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए किया गया था। उनके मुताबिक, उनके कार्यकाल में लोक सेवा आयोग को समय पर परीक्षाएं कराने के लिए बाध्य किया गया और शीर्ष पदों पर दो बार भर्तियां भी हुईं।
रावत ने बताया कि उनके छोटे से कार्यकाल में भर्ती बोर्डों का गठन किया गया था। इनमें मेडिकल भर्ती बोर्ड और शिक्षा भर्ती बोर्ड भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि अगर उस प्रक्रिया के दौरान नियुक्तियों में उनसे किसी तरह की निर्णय संबंधी गलती हुई है तो वह उत्तराखंड के लोगों से इसके लिए माफी मांगते हैं।
हालांकि, रावत ने अपने कार्यकाल के दौरान 42 हजार से ज्यादा सरकारी पदों पर भर्तियां होने का दावा दोहराया। उन्होंने कहा कि अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष पद पर जिस व्यक्ति की नियुक्ति की गई थी, उसे शिकायत मिलने के बाद उन्होंने हटाया था या उनसे इस्तीफा मांगा था।
चंदन सिंह जीना की नियुक्ति पर क्या बोले हरीश रावत
हरीश रावत ने कहा कि चंदन सिंह जीना की नियुक्ति उनके पिछले सेवा रिकॉर्ड के आधार पर की गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि जिस वर्ग से जीना आते थे, वह चाहते थे कि सत्ता में उस वर्ग की भी भागीदारी हो। रावत के अनुसार, उनकी नियुक्ति को लेकर उन्हें तत्कालीन मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी से भी प्रभावी सलाह मिली थी और खंडूरी दो बार उनसे इस नियुक्ति के संबंध में मिलने आए थे।
रावत ने कहा कि उनकी आज भी धारणा है कि खंडूरी हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करते रहे। उन्होंने यह भी कहा कि कोई व्यक्ति भविष्य में कहां गलती कर देगा, इसका पहले से अंदाजा लगाना संभव नहीं होता। उन्होंने आरएसएस से जुड़े एक उदाहरण का जिक्र करते हुए कहा कि जिस व्यक्ति को उत्तराखंड के पर्यावरण मंच का अध्यक्ष बनाया गया हो, उसके बारे में पहले से यह जानना संभव नहीं था कि वह आगे चलकर इस तरह के भ्रष्ट कृत्य करेगा और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष के रूप में कलंकित होगा।
चंदन सिंह जीना कौन हैं?
चंदन सिंह जीना हरीश रावत के सहयोगी और पूर्व ओएसडी रह चुके हैं। जब रावत उत्तराखंड के मुख्यमंत्री थे, तब जीना वर्ष 2014 से 2017 तक उनके ओएसडी के तौर पर कार्यरत थे।
उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ओर से आयोजित परीक्षा में गड़बड़ी के मामले को लेकर जीना के आवास पर छापेमारी की गई थी। ईडी के अनुसार, उनके आवास से 32 लाख रुपये नकद, 12 लग्जरी घड़ियां और 200 ग्राम सोना बरामद किया गया था।
