प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के एक मामले में पुलिस अधिकारियों की ओर से अदालत के आदेश का पालन नहीं किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक को 24 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया था, लेकिन वह अदालत में उपस्थित नहीं हो सके। अब हाईकोर्ट ने उन्हें दोबारा तलब करते हुए 1 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति समीर जैन ने डीजीपी से यह बताने को कहा है कि पुलिस अधिकारी हाईकोर्ट के आदेशों का पालन करने में लापरवाही क्यों बरत रहे हैं।
यह आदेश पुष्पराज सिंह उर्फ बब्लू की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान दिया गया। इससे पहले 19 अगस्त 2026 को अदालत ने राज्य सरकार को 16 जुलाई को कथित घटना के समय और 21 जून 2025 की सीसीटीवी फुटेज में दर्ज समय के बीच अंतर को लेकर विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद सुनवाई की तारीख तक राज्य सरकार की ओर से जवाबी हलफनामा दाखिल नहीं किया गया।
अदालत ने इसे बताया घोर अनादर
सुनवाई के दौरान अपर शासकीय अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए उन्होंने दो बार पत्र भेजे थे। इसके बावजूद कोई पुलिस अधिकारी अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। इस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए इसे अदालत का घोर अनादर बताया।
अदालत ने कहा कि इस तरह की समस्या बार-बार सामने आ रही है। पुलिस अधिकारियों के इस रवैये की वजह से हत्या के मामलों में जमानत अर्जियां लंबे समय तक लंबित रहती हैं और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है।
डीजीपी की जगह एडीजी जोन प्रयागराज पहुंचे
हाईकोर्ट ने डीजीपी को 24 अगस्त को दोपहर दो बजे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया था। हालांकि, आदेश के अनुपालन में डीजीपी खुद अदालत में उपस्थित नहीं हुए। उनकी जगह एडीजी जोन प्रयागराज अदालत में पेश हुए।
कोर्ट इससे संतुष्ट नहीं हुआ। अदालत ने कहा कि यदि किसी कारणवश डीजीपी उस दिन उपस्थित नहीं हो सके तो उन्हें 1 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर इस संबंध में स्पष्टीकरण देना होगा।
बी फार्मा के लिए NOC को लेकर भी हाईकोर्ट के सवाल
इसी बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सोमवार को बैचलर ऑफ फार्मेसी यानी बी फार्मा पाठ्यक्रम शुरू करने से पहले संस्थानों के लिए राज्य सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने की अनिवार्यता को लेकर कई अहम सवाल उठाए।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया से इस मामले में जरूरी दस्तावेजों के साथ विस्तृत जवाब मांगा है। अदालत कई शिक्षण संस्थानों, फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया और उत्तर प्रदेश सरकार से जुड़े मामलों की एक साथ सुनवाई कर रही थी।
फार्मेसी काउंसिल से दो हफ्ते में जवाब मांगा
पीठ ने फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया को निर्देश दिया कि जरूरत होने पर वह दो सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करे। मामले को अगली सुनवाई के लिए दो सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का आदेश दिया गया है।
अदालत ने कहा कि बैचलर ऑफ फार्मेसी पाठ्यक्रम नियमन 2014 के तहत मंजूरी मांगने वाले संस्थान के पास निर्धारित सुविधाएं होना जरूरी है। इनमें भवन, रहने की व्यवस्था, प्रयोगशालाएं, आवश्यक उपकरण और शिक्षण तथा गैर-शिक्षण कर्मचारियों की उपलब्धता शामिल है।
