ईरान को परमाणु कार्यक्रम से मुक्त करना हमारा साझा लक्ष्य, जरूरत पड़ी तो फिर होंगे हमले: नेतन्याहू का बड़ा बयान

ईरान और अमेरिका के बीच जारी शांति प्रयासों के बीच इजरायल की ओर से एक सख्त और स्पष्ट संदेश सामने आया है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संकेत दिया है कि यदि तय लक्ष्य पूरे नहीं हुए तो तेहरान पर दोबारा सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। उनके इस बयान ने क्षेत्र में पहले से जारी तनाव को और बढ़ा दिया है।

अमेरिका-इजरायल के लक्ष्य पूरी तरह एक जैसे

नेतन्याहू ने कहा कि ईरान को लेकर इजरायल और अमेरिका की रणनीति पूरी तरह एक जैसी है। दोनों देशों का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु क्षमता से वंचित करना है। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका लगातार इजरायल को ईरान के साथ अपनी कूटनीतिक बातचीत की जानकारी दे रहा है, जिससे दोनों देशों के बीच तालमेल बना हुआ है।

यूरेनियम संवर्धन खत्म करने पर जोर

इजरायल और अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वे ईरान के पास मौजूद समृद्ध यूरेनियम को हटाने और उसकी संवर्धन क्षमता को पूरी तरह समाप्त करने के पक्ष में हैं। साथ ही प्रमुख समुद्री मार्गों को खुले रखने की भी मांग की जा रही है। नेतन्याहू ने दोहराया कि इन मुद्दों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

सीजफायर के बीच फिर जंग की आशंका

नेतन्याहू ने संकेत दिया कि मौजूदा हालात में यह कहना जल्दबाजी होगी कि संघर्ष किस दिशा में जाएगा, लेकिन इजरायल हर स्थिति के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू की जा सकती है। यह बयान उस समय आया है जब दो सप्ताह का नाजुक युद्धविराम लागू है, जो 22 अप्रैल को समाप्त होने वाला है।

हिजबुल्लाह के खिलाफ अभियान जारी

इजरायली प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सेना उत्तरी इजरायल के नागरिकों के साथ खड़ी है और लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर लगातार कार्रवाई जारी है। दक्षिणी लेबनान के बिंत ज्बील इलाके में चल रहे ऑपरेशन का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि इजरायली सेना उस क्षेत्र पर नियंत्रण के करीब पहुंच चुकी है। यह इलाका लंबे समय से हिजबुल्लाह के प्रभाव का केंद्र माना जाता रहा है।

लेबनान के साथ बातचीत का भी दावा

नेतन्याहू ने यह भी कहा कि लेबनान के साथ बातचीत जारी है, जिसकी मध्यस्थता अमेरिका कर रहा है। उन्होंने बताया कि इस वार्ता का उद्देश्य हिजबुल्लाह को निरस्त्र करना और स्थायी शांति स्थापित करना है। इसके लिए सुरक्षा क्षेत्र बढ़ाने और बफर जोन बनाने जैसे प्रस्तावों पर भी विचार किया जा रहा है।

कुल मिलाकर, इजरायल का यह रुख साफ करता है कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा वैश्विक राजनीति का केंद्र बना रह सकता है।

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