नई दिल्ली / कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद जारी राजनीतिक खींचतान ने शनिवार को उस समय एक गंभीर मोड़ ले लिया, जब डायमंड हार्बर से सांसद और टीएमसी के दिग्गज नेता अभिषेक बनर्जी पर हिंसक हमला हुआ। यह घटना उस समय घटी जब अभिषेक बनर्जी सोनारपुर साउथ में चुनाव बाद हुई हिंसा (Post-Poll Violence) के पीड़ित टीएमसी कार्यकर्ताओं के परिवारों से मिलने पहुंचे थे। इस हमले के बाद जहां बंगाल की धरती विरोध प्रदर्शनों से सुलग उठी है, वहीं दिल्ली के सियासी गलियारों में भी बयानों के तीर चलने लगे हैं।
कैसे और क्या हुआ सोनारपुर में?
शनिवार को अभिषेक बनर्जी सोनारपुर में मारे गए टीएमसी कार्यकर्ता संजू कर्माकर के परिवार से मिलने जा रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इसी दौरान वहां मौजूद एक आक्रामक भीड़ ने उन्हें घेर लिया। भीड़ ने “चोर-चोर” के नारे लगाते हुए उन पर पथराव किया, अंडे, जूते और अन्य वस्तुएं फेंकी।
स्थिति इतनी बिगड़ गई कि सुरक्षाकर्मियों को अभिषेक बनर्जी को बचाने के लिए उन्हें क्रिकेट हेलमेट पहनाना पड़ा। भीड़ ने उनका पीछा किया, उनके साथ हाथापाई की कोशिश की, जिससे उनकी कमीज भी फट गई। किसी तरह सुरक्षा घेरे में उन्हें वहां से निकालकर कोलकाता के अस्पताल ले जाया गया।
“वे मुझे मारना चाहते थे” — अभिषेक बनर्जी का गंभीर आरोप
अस्पताल से व्हीलचेयर पर बाहर निकलते हुए अभिषेक बनर्जी ने इस हमले को पूरी तरह से प्रायोजित बताया। उन्होंने कहा:
“यह हमला पूरी तरह से बीजेपी प्रायोजित और पूर्व-नियोजित था। वे मुझे जान से मारना चाहते थे। चुनाव नतीजों को अभी एक महीना भी नहीं हुआ है और राज्य में पुलिस कहीं दिखाई नहीं दे रही है। हम इस मामले को लेकर हाई कोर्ट और राज्यपाल के पास जाएंगे।”

कोलकाता में अस्पतालों पर सियासत और टीएमसी का राज्यव्यापी प्रदर्शन
इस घटना के बाद बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और अभिषेक की बुआ ममता बनर्जी तुरंत अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने कोलकाता के दो निजी अस्पतालों (अपोलो और बेले व्यू) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “ऊपर से भारी दबाव” के कारण डॉक्टर अभिषेक को भर्ती नहीं कर रहे थे और उनके इलाज में आनाकानी की गई। हालांकि, अस्पतालों का कहना था कि चोटें सतही थीं, इसलिए भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ी।
TMC का पलटवार: तृणमूल कांग्रेस ने इस घटना को ‘लोकतंत्र के लिए काला दिन’ घोषित किया है। पार्टी ने इस हमले के विरोध में रविवार से पूरे पश्चिम बंगाल में व्यापक स्तर पर राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
बीजेपी का रुख: “यह जनता का गुस्सा है”
दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस हमले में अपनी किसी भी भूमिका से साफ इनकार किया है। हालिया विधानसभा चुनावों में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाली बीजेपी के नेताओं का कहना है कि यह हमला किसी राजनीतिक दल ने नहीं, बल्कि स्थानीय जनता ने किया है। बीजेपी के मुताबिक, यह टीएमसी के खिलाफ आम लोगों का गुस्सा है जो इस रूप में बाहर आया है।
दिल्ली तक गूंज: विपक्षी पार्टियां आईं साथ
कोलकाता में शुरू हुई इस घटना की गूंज दिल्ली तक पहुंच चुकी है। राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों (INDIA ब्लॉक) ने एकजुटता दिखाते हुए इस हमले की कड़ी निंदा की है। विपक्षी नेताओं ने केंद्र और बंगाल प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए इसे “प्रतिशोध और डराने-धमकाने की राजनीति” करार दिया है। इस घटना ने बिखरे हुए विपक्ष को एक बार फिर से एकजुट होने का मौका दे दिया है।
अभिषेक बनर्जी पर हुए इस हमले और उसी दिन सीआईडी (CID) द्वारा उन्हें भेजे गए समन ने बंगाल की राजनीति को पूरी तरह गरमा दिया है। एक तरफ जहां टीएमसी इसे अपनी अस्मिता की लड़ाई बनाकर सड़कों पर उतर आई है, वहीं बीजेपी इसे कानून-व्यवस्था और जन-आक्रोश का मामला बता रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक और तेज होने के पूरे आसार हैं।
