सोनीपत: भारत की पहली हाइड्रोजन ईंधन से संचालित ट्रेन अब जींद से दिल्ली के बीच दौड़ने की तैयारी में है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। फिलहाल इसका परीक्षण सोनीपत से दिल्ली के बीच किया जा रहा है। यह ट्रेन पारंपरिक ईंधन की जगह हाइड्रोजन तकनीक पर आधारित है और इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इससे धुआं नहीं, बल्कि केवल पानी का उत्सर्जन होगा।
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जहां हाइड्रोजन ट्रेन की पूरी तकनीक विकसित की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि यह तकनीक पूरी तरह स्वदेशी है और इसके सभी बौद्धिक संपदा अधिकार भारत के पास सुरक्षित हैं।
सोनीपत से दिल्ली के बीच जारी है परीक्षण
रेल मंत्री ने बताया कि फिलहाल हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल सोनीपत से दिल्ली के बीच किया जा रहा है। परीक्षण सफल होने के बाद इसे जींद से दिल्ली तक नियमित रूप से संचालित किया जाएगा। उनके अनुसार यह परियोजना हरित परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में देश का महत्वपूर्ण कदम है।
हाइड्रोजन फ्यूल सेल से तैयार होगी बिजली
अश्विनी वैष्णव के मुताबिक ट्रेन को चलाने के लिए हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक का उपयोग किया गया है। यह फ्यूल सेल हवा से मिलने वाली ऑक्सीजन और हाइड्रोजन की रासायनिक प्रक्रिया के जरिए बिजली उत्पन्न करता है, जिससे ट्रेन के मोटर संचालित होते हैं।
शिव नादर विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर हरप्रीत सिंह अरोरा ने बताया कि यही आधुनिक तकनीक इस ट्रेन को पारंपरिक ईंधन आधारित ट्रेनों से अलग बनाती है।
धुएं की जगह केवल पानी का होगा उत्सर्जन
हाइड्रोजन ट्रेन की सबसे बड़ी विशेषता इसका पर्यावरण अनुकूल संचालन है। इस तकनीक के कारण ट्रेन से कार्बन उत्सर्जन नहीं होता और धुएं के स्थान पर केवल पानी निकलता है। इसके लिए जींद में पानी से हाइड्रोजन तैयार करने का विशेष संयंत्र भी स्थापित किया गया है।
पूरी तकनीक स्वदेशी, भारत के पास सुरक्षित हैं अधिकार
रेल मंत्री ने कहा कि इस परियोजना की अहम उपलब्धि यह है कि पूरी तकनीक देश में विकसित की गई है। इसके सभी बौद्धिक संपदा अधिकार भारत के पास सुरक्षित हैं। उन्होंने बताया कि इस तकनीक का परीक्षण और प्रमाणीकरण दुनिया की प्रतिष्ठित एजेंसियों द्वारा किया गया है, जिससे इसकी सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित हुई है।
रेलवे से आगे अन्य क्षेत्रों में भी होगा उपयोग
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि रेलवे में सफल उपयोग के बाद इस तकनीक को अन्य परिवहन क्षेत्रों में भी अपनाया जा सकेगा। इसका छोटा संस्करण ट्रकों में लगाया जा सकता है, जबकि समुद्री परिवहन में छोटी और मध्यम आकार की नौकाओं में भी इसका उपयोग संभव होगा। उन्होंने कहा कि स्वदेशी तकनीक का विकास भविष्य में भारत की दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा।
हरियाणा में 18 हजार करोड़ रुपये की रेलवे परियोजनाओं पर काम
रेल मंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय हरियाणा को रेलवे के लिए केवल 300 करोड़ रुपये का बजट मिलता था, जबकि अब केंद्र सरकार ने रेलवे बजट में 11 गुना बढ़ोतरी की है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में हरियाणा में लगभग 18 हजार करोड़ रुपये की रेलवे परियोजनाओं पर काम चल रहा है।
विशेषज्ञों ने भविष्य को लेकर जताई सकारात्मक उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन भारतीय रेलवे को जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता से बाहर निकालने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। हालांकि उनका कहना है कि इसका दीर्घकालिक भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि नवीकरणीय ऊर्जा से तैयार सस्ता हरित हाइड्रोजन कितनी आसानी से उपलब्ध हो पाता है और यह आर्थिक रूप से कितना व्यवहारिक साबित होता है।
