नई दिल्ली। नीट (NEET) पेपर लीक विवाद और देशव्यापी छात्र आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ने पर सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और एनसीपी समेत पूरे विपक्षी खेमे ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को देश के युवाओं और छात्रों के संघर्ष की बड़ी जीत करार दिया है। विपक्षी नेताओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर सिलसिलेवार पोस्ट जारी कर केंद्र सरकार पर कड़ा हमला बोला है।
लोकतंत्र में जवाबदेही से नहीं बच सकते: शशि थरूर
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा इस बात की स्वीकारोक्ति है कि लोकतंत्र में जवाबदेही से अनिश्चितकाल के लिए नहीं बचा जा सकता। उन्होंने कहा कि यह फैसला देश भर के छात्रों, अभिभावकों और नागरिकों द्वारा हफ्तों तक उठाई गई दृढ़ और शांतिपूर्ण आवाजों का नतीजा है, जिन्हें खारिज करने से सरकार ने इनकार कर दिया था।
संसद में मूलभूत मुद्दों पर चर्चा का रास्ता साफ हो: पी. चिदंबरम
पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने लिखा कि उन्हें अभी-अभी केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की खबर मिली है और वे इस कदम का स्वागत करते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस फैसले से स्थिति शांत होगी और संसद के भीतर व बाहर देश की शिक्षा व्यवस्था के मूलभूत मुद्दों पर सार्थक चर्चा का रास्ता साफ होगा।
सत्य की शक्ति और जनता की ताकत: सुप्रिया श्रीनेत
कांग्रेस की सोशल मीडिया चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत ने धर्मेंद्र प्रधान के त्यागपत्र की प्रति साझा करते हुए एक संक्षिप्त और कड़ा संदेश लिखा। उन्होंने लिखा कि यह सत्य की शक्ति है और यह देश की जनता की ताकत है, जिसके आगे धर्मेंद्र प्रधान को अपना इस्तीफा देना पड़ा।
यह सिर्फ शुरुआत है, संसद में हो विस्तृत चर्चा: सुप्रिया सुले
एनसीपी (एसपी) सांसद सुप्रिया सुले ने लिखा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों, छात्रों और विपक्ष के निरंतर दबाव के बाद ही संभव हो सका है। उन्होंने नीट मुद्दे पर डटे रहने वाले हर प्रदर्शनकारी को बधाई दी। हालांकि, उन्होंने कहा कि यह अंत नहीं हो सकता; विपक्ष वास्तविक जवाबदेही, व्यापक शिक्षा सुधारों और संसद में नीट मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की मांग करता है।
किस कीमत पर मिला इस्तीफा? कपिल सिब्बल का सवाल
राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कड़े शब्दों में तंज कसते हुए लिखा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तो हो गया, लेकिन किस कीमत पर? उन्होंने लिखा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठियां चलाई गईं, उन्हें चोटें आईं, आंखों में पैलेट गन के छर्रे घुसे और वे 23 दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठे रहे। सिब्बल ने सवाल उठाया कि इस भारी नुकसान की भरपाई आखिर कौन करेगा?
युवाओं के संघर्ष की पहली बड़ी जीत, लड़ाई जारी रहेगी: दीपेंद्र सिंह हुड्डा
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने एक वीडियो संदेश के साथ लिखा कि यह केवल एक मंत्री का इस्तीफा नहीं है, बल्कि देश के लाखों युवाओं और छात्रों के संघर्ष की पहली बड़ी जीत है। उन्होंने कहा कि जो सरकार युवाओं की आवाज को लगातार अनसुना कर रही थी, उसे आज आखिरकार झुकना ही पड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और जब तक पूरी व्यवस्था में सुधार व छात्रों को न्याय नहीं मिलता, तब तक उनका संघर्ष नहीं रुकेगा।
विपक्षी एकजुटता और छात्रों के भविष्य की जीत: राजीव शुक्ला
कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का स्वागत करते हुए लिखा कि यह भारत के छात्रों, युवाओं और विपक्षी एकजुटता की बड़ी जीत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार केवल इस्तीफे तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भविष्य में कोई भी पेपर लीक न हो, इसके लिए ठोस कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में व्यापक सुधार समय की मांग हैं और हमें अपने युवाओं की बात सुननी ही होगी।
देर आए दुरुस्त आए, देशवासियों को बधाई: पवन खेड़ा
कांग्रेस मीडिया विभाग के पवन खेड़ा ने तंज कसते हुए लिखा कि यह फैसला काफी देर से आया है, लेकिन आखिरकार ‘जान छूटी’ (good riddance)। उन्होंने इस मोड़ पर भारत की जनता और संघर्षरत युवाओं को हृदय से बधाई दी।
GenZ युवाओं के आगे झुका मोदी जी का अहंकार: आतिशी
दिल्ली सरकार की मंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) नेता आतिशी ने लिखा कि यह जीत देश की युवा शक्ति की जीत है। धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना ही पड़ा। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश की ‘GenZ’ (नई पीढ़ी) के सामने मोदी जी का अहंकार झुकने पर मजबूर हो गया। उन्होंने आंदोलन में हिस्सा लेने वाले हर युवा को नमन किया।
