हाईकोर्ट के आदेश पर ग्वालियर में चला बुलडोजर, 75 मकान जमींदोज; बेघर परिवारों का फूटा गुस्सा, उठाए बड़े सवाल

ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रशासन ने बड़ी अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई करते हुए गोला का मंदिर क्षेत्र स्थित नारायण विहार कॉलोनी में बुलडोजर चलाया। जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई के दौरान करीब 75 मकानों को ध्वस्त कर दिया। अचानक हुई इस कार्रवाई से इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और प्रभावित परिवारों में भारी नाराजगी देखने को मिली।

कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे मौके पर मौजूद रहे। अपने घर टूटते देख लोगों का आक्रोश फूट पड़ा और उन्होंने अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की। हालात को नियंत्रण में रखने के लिए क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। कई स्थानों पर प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय लोगों के बीच तीखी बहस भी हुई।

बेघर हुए लोगों ने लगाए साजिश के आरोप

कार्रवाई से प्रभावित लोगों का कहना है कि वे न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हैं, लेकिन जिस याचिका के आधार पर यह कार्रवाई हुई, उसमें तथ्यों को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया गया। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि विवाद एक पहुंच मार्ग को लेकर है, जबकि वहां पहले से पर्याप्त रास्ता मौजूद है। उनका दावा है कि पूरी कार्रवाई के पीछे निजी हितों को साधने की कोशिश की गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि वे पिछले दो से ढाई दशक से इस क्षेत्र में रह रहे हैं। उनके मुताबिक, वर्षों तक प्रशासन ने कभी इस जमीन को लेकर कोई आपत्ति नहीं जताई, लेकिन अब अचानक बड़ी कार्रवाई कर सैकड़ों लोगों को बेघर कर दिया गया। प्रभावित परिवारों का कहना है कि अधिकांश लोग मजदूरी और छोटे-मोटे काम करके परिवार चलाते हैं और अब उनके सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है।

प्रशासन पर भी उठे सवाल

नारायण विहार के निवासियों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों के दबाव में यह कदम उठाया गया। लोगों का कहना है कि उनकी बात सुने बिना और वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना घरों को तोड़ दिया गया, जिससे कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए हैं।

प्रशासन का पक्ष, नोटिस और समय देने का दावा

वहीं प्रशासन ने कार्रवाई को पूरी तरह न्यायालय के आदेश के अनुरूप बताया है। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित लोगों को पहले ही नोटिस जारी किए गए थे और मकान खाली करने के लिए पर्याप्त समय भी दिया गया था। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई से पहले लोगों को समझाया गया और पूरी प्रक्रिया कानून के तहत शांतिपूर्ण तरीके से पूरी की गई।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई की रिपोर्ट न्यायालय को सौंपी जाएगी। साथ ही प्रभावित लोगों को भी न्यायालय में अपना पक्ष रखने का अधिकार है।

बुलडोजर एक्शन के बाद नेताओं पर भी बरसा गुस्सा

घरों के ध्वस्तीकरण के बाद लोगों का गुस्सा राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों पर भी देखने को मिला। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि संकट की इस घड़ी में कोई भी जनप्रतिनिधि उनकी मदद के लिए आगे नहीं आया। नाराज लोगों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे भविष्य में चुनावों का बहिष्कार करने पर विचार करेंगे।

 

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