मुंबई: टाटा ग्रुप के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के इस्तीफे की खबर ने बुधवार को कारोबारी जगत को चौंका दिया। खास बात यह रही कि जिस दिन उनके इस्तीफे की खबर सामने आई, उस दिन भी उनकी दिनचर्या लगभग सामान्य रही। समूह के कई वरिष्ठ अधिकारियों और करीबी सहयोगियों को भी उनके फैसले की पहले से जानकारी नहीं थी।
63 वर्षीय चंद्रशेखरन ने टाटा ग्रुप में करीब चार दशक का सफर तय किया है। उनके इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद समूह के भीतर से लेकर पूरे उद्योग जगत तक इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई।
इस्तीफे से एक रात पहले भी सामान्य कार्यक्रम में शामिल हुए
इस्तीफे के अगले दिन से पहले मंगलवार रात चंद्रशेखरन ने भारतीय स्टेट बैंक के पूर्व चेयरमैन ओपी भट्ट और हाने बिरगिट सोरेंसन के विदाई समारोह में हिस्सा लिया था। दोनों टाटा मोटर्स के बोर्ड से सेवानिवृत्त हो रहे थे, जहां चंद्रशेखरन नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन हैं।
बताया गया कि चंद्रशेखरन ने अपने इस्तीफे के फैसले की जानकारी सबसे पहले परिवार को दी और इसके बाद समूह के अन्य लोगों को इस बारे में बताया।
सुबह सामान्य बैठक, फिर टाटा संस बोर्ड को भेजा इस्तीफा
बुधवार को चंद्रशेखरन ने अपना कामकाजी दिन भी सामान्य तरीके से शुरू किया। उन्होंने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के प्रबंधन के साथ नियमित कारोबारी मामलों को लेकर बैठक की। इस बैठक में कंपनी के सीईओ के. कृतिवासन और सीओओ आरती सुब्रमण्यम भी मौजूद थीं।
इसके बाद चंद्रशेखरन बॉम्बे हाउस स्थित अपने चौथी मंजिल के कार्यालय पहुंचे। यहीं से उन्होंने टाटा संस के बोर्ड को अपना इस्तीफा भेजा।
इसी दौरान उन्होंने एयर इंडिया के नए सीईओ गेब्रेमरियम से भी बातचीत की। उन्होंने उन्हें भरोसा दिलाया कि अगले छह महीने तक वह उनके साथ मिलकर काम करते रहेंगे। बताया जाता है कि गेब्रेमरियम को भी चंद्रशेखरन के फैसले की पहले से जानकारी नहीं थी और वह इससे हैरान रह गए।
कृतिवासन और आरती सुब्रमण्यम भी रह गए हैरान
चंद्रशेखरन के इस्तीफे की जानकारी उनके साथ बैठक में मौजूद कृतिवासन और आरती सुब्रमण्यम को भी पहले से नहीं थी। बाद में जब सहयोगियों ने उनसे इस बारे में पूछा तो उन्होंने भी खुद को बाकी लोगों की तरह ही हैरान बताया।
इस्तीफे के दिन चंद्रशेखरन ने टाटा मोटर्स के कमर्शियल वाहन कारोबार से जुड़ी बोर्ड बैठक में भी हिस्सा लिया। इसके बाद उन्होंने प्रबंधन के साथ लंच किया। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, बोर्ड बैठक से पहले जब वह चंद्रशेखरन से मिले तो वह सामान्य रूप से हंसी-मजाक कर रहे थे। किसी को भी अंदाजा नहीं था कि कुछ ही समय में इतना बड़ा फैसला सामने आने वाला है।
अचानक करीब 200 कर्मचारियों के बीच पहुंचे चंद्रशेखरन
दिन की सबसे अहम घटनाओं में से एक दोपहर करीब साढ़े तीन बजे हुई। चंद्रशेखरन अचानक बॉम्बे हाउस के भीतर स्थित स्टारबक्स आउटलेट पहुंचे। वहां उन्होंने करीब 200 कर्मचारियों के साथ संक्षिप्त बातचीत की।
टाटा संस, टाटा स्टील, टाटा मोटर्स और समूह की दूसरी कंपनियों के कर्मचारी उनके आसपास जमा हो गए। करीब पांच मिनट की बातचीत में चंद्रशेखरन ने कर्मचारियों से समूह को लेकर चल रही अटकलों और चर्चाओं से प्रभावित नहीं होने की अपील की।
उन्होंने कर्मचारियों से कहा कि सोशल मीडिया पर लिखी जा रही हर बात पर भरोसा न करें।
कर्मचारियों से कहा- संगठन किसी एक व्यक्ति से बड़ा होता है
चंद्रशेखरन ने कर्मचारियों को यह भी संदेश दिया कि संगठन किसी एक व्यक्ति से बड़ा होता है और सभी को अपने काम पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि टाटा समूह उसके लोगों से बना है और कर्मचारी ही संगठन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बातचीत खत्म होने के बाद कर्मचारियों ने तालियों से उनका अभिवादन किया। इस दौरान माहौल भावुक भी हो गया और कई कर्मचारी भावुक नजर आए।
