मानसून में धरती पर उतर आता है जन्नत का नजारा! मांडू की वादियां, जहाज महल से एको पॉइंट तक हर दृश्य कर देगा मंत्रमुग्ध

भोपाल: मध्य प्रदेश का ऐतिहासिक शहर मांडू मानसून के मौसम में अपनी सबसे खूबसूरत तस्वीर पेश करता है। हरियाली से ढकी पहाड़ियां, बादलों से घिरे प्राचीन महल और बारिश की बूंदों से निखरती ऐतिहासिक इमारतें इस जगह को किसी स्वर्ग से कम नहीं बनातीं। प्राकृतिक सौंदर्य और अद्भुत वास्तुकला के संगम के कारण मांडू को यूनेस्को की अस्थायी विश्व धरोहर सूची में भी शामिल किया गया है।

धार जिले में स्थित मांडू, जिसे मांडव के नाम से भी जाना जाता है, इंदौर से करीब 100 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है। आज भले ही यह एक शांत और छोटा शहर दिखाई देता हो, लेकिन इतिहास के पन्नों में इसका नाम कभी दुनिया के समृद्ध और बड़े शहरों में शुमार रहा है।

विंध्याचल पर्वत श्रृंखला पर समुद्र तल से करीब दो हजार फीट की ऊंचाई पर बसा मांडू अपनी अनोखी भौगोलिक बनावट के लिए भी जाना जाता है। गहरी खाई इसे मालवा के पठार से अलग करती है, जिसने इसे सदियों तक राजाओं और शासकों का सुरक्षित गढ़ बनाए रखा। इसी दौर में यहां कई भव्य और ऐतिहासिक इमारतों का निर्माण हुआ, जो आज भी अपनी स्थापत्य कला के लिए दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।

जहाज महल: पानी के बीच खड़े जहाज जैसा दिखता है अद्भुत महल

मांडू की पहचान माने जाने वाला जहाज महल दो कृत्रिम झीलों कूपर और मुंज सागर के बीच स्थित है। इसकी बनावट ऐसी है कि दूर से देखने पर यह पानी में खड़े विशाल जहाज जैसा प्रतीत होता है। बारिश के मौसम में जब दोनों झीलें लबालब भर जाती हैं, तब इस महल की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है।

हिंडोला महल: झूले जैसी बनावट वाली ऐतिहासिक इमारत

मांडू के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हिंडोला महल अपनी अनोखी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। इसकी झुकी हुई दीवारें इसे झूले जैसा स्वरूप देती हैं, जिसके कारण इसका नाम हिंडोला महल पड़ा। कभी यह शाही दरबार का हिस्सा हुआ करता था और मांडू के राजमहल परिसर की महत्वपूर्ण इमारतों में गिना जाता है।

होशांग शाह का मकबरा: संगमरमर की भव्यता का ऐतिहासिक उदाहरण

सफेद संगमरमर से बना होशांग शाह का मकबरा मांडू की सबसे खास धरोहरों में शामिल है। इसे भारत की पहली संगमरमर निर्मित इमारत माना जाता है। मान्यता है कि ताजमहल के निर्माण से पहले मुगल बादशाह शाहजहां ने अपने वास्तुकार उस्ताद हामिद को इस मकबरे की स्थापत्य शैली का अध्ययन करने के लिए यहां भेजा था।

जामी मस्जिद: बिना माइक के हर कोने तक पहुंचती है आवाज

मांडू की सबसे पुरानी इमारतों में शामिल जामी मस्जिद का निर्माण होशांग शाह के शासनकाल में शुरू हुआ था, जबकि बाद में मोहम्मद खिलजी के समय इसका विस्तार किया गया। लगभग 4.6 मीटर ऊंचे चबूतरे पर बनी इस मस्जिद में चार बड़े और 160 छोटे गुंबद बनाए गए थे, हालांकि वर्तमान में इनमें से करीब 80 गुंबद ही शेष हैं। इसकी वास्तुकला ऐसी है कि बिना किसी ध्वनि विस्तारक यंत्र के भी आवाज आसानी से पूरे परिसर में सुनाई देती है।

बाज बहादुर महल: संगीत और प्रेम की कहानियों का गवाह

मालवा के सुल्तान मलिक बैजिद, जिन्हें बाज बहादुर के नाम से जाना जाता है, संगीत और युद्धकला दोनों में निपुण थे। माना जाता है कि वे राग दीपक के महान गायक थे। रानी दुर्गावती से युद्ध में पराजय के बाद उन्होंने मांडू को अपना ठिकाना बनाया और संगीत साधना में जीवन समर्पित कर दिया। इसी महल में वे अपनी रानी रूपमती के साथ संगीत का अभ्यास किया करते थे।

रूपमती मंडप: जहां से दिखती है नर्मदा की मनमोहक छटा

बाज बहादुर महल के निकट स्थित रूपमती मंडप मांडू के सबसे लोकप्रिय स्थलों में गिना जाता है। मान्यता है कि रानी रूपमती यहां से प्रतिदिन नर्मदा नदी के दर्शन किया करती थीं। बारिश के मौसम में यहां से दिखाई देने वाला नर्मदा घाटी का दृश्य पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।

एको पॉइंट: जहां लौटकर आती है आपकी आवाज

मांडू का एको पॉइंट पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय है। दाई महल की दिशा में खड़े होकर तेज आवाज लगाने पर उसकी गूंज स्पष्ट रूप से सुनाई देती है। इसकी संरचना को इस तरह तैयार किया गया है कि ध्वनि काफी दूर तक पहुंच सकती है।

बारिश का मौसम मांडू घूमने के लिए सबसे बेहतरीन

विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों के अनुसार मांडू घूमने का सबसे अच्छा समय मानसून का मौसम माना जाता है। जुलाई से सितंबर के बीच विंध्याचल की पहाड़ियां हरियाली की चादर ओढ़ लेती हैं और मौसम बेहद सुहावना हो जाता है। ऐसे में ऐतिहासिक धरोहरों और प्राकृतिक नजारों का आनंद कई गुना बढ़ जाता है।

 

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