7 KM साइकिल चलाकर रोज कोचिंग जाते थे किसान के बेटे आदित्य, हिंदी मीडियम से दूसरे प्रयास में क्रैक किया UPSC; ऐसे बने IAS

आजमगढ़: जिले के लालपुर गौहर गांव के रहने वाले आदित्य सिंह ने सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बीच यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास कर मिसाल कायम की है। किसान परिवार से आने वाले आदित्य ने हिंदी माध्यम से परीक्षा की तैयारी की और दूसरे प्रयास में सफलता हासिल की। उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा में 508वीं अखिल भारतीय रैंक हासिल की है।

कक्षा 12वीं में देखा था IAS बनने का सपना

आदित्य सिंह चार भाई-बहनों में से एक हैं। उनके पिता किसान हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। साधारण पारिवारिक और आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी। कक्षा 12वीं के दौरान उनके मन में आईएएस बनने का विचार आया। उस समय उन्हें यूपीएससी की परीक्षा, उसके पेपर और पाठ्यक्रम के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी।

आदित्य के मुताबिक, गांव की समस्याओं को करीब से देखने के कारण उनके भीतर सिविल सेवा में जाने की इच्छा पैदा हुई। गांव में सरकारी योजनाओं को लेकर जागरूकता की कमी, बुनियादी ढांचे और संपर्क सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं ने उन्हें प्रभावित किया। उनका मानना था कि एक सक्षम सिविल सेवक इन समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

पिता और छोटी बहन ने दिया सबसे बड़ा साथ

आदित्य अपनी सफलता का श्रेय परिवार को देते हैं। उनके मुताबिक, उनकी पूरी तैयारी के दौरान उनके पिता का सबसे अधिक योगदान रहा। छोटी बहन ने भी उन्हें लगातार सहयोग दिया। आदित्य का कहना है कि उनकी तैयारी के पूरे सफर को सबसे करीब से उनकी छोटी बहन ने समझा है।

आर्थिक स्थिति के कारण दिल्ली की जगह चुना प्रयागराज

आदित्य यूपीएससी की तैयारी के लिए आजमगढ़ से प्रयागराज पहुंचे। उनकी इच्छा दिल्ली जाकर तैयारी करने की थी, लेकिन आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने प्रयागराज को चुना। वह सलोरी में रहकर पढ़ाई करते थे और दृष्टि कोचिंग संस्थान से तैयारी की।

कोचिंग संस्थान उनके कमरे से करीब 7 किलोमीटर दूर था। रोजाना आने-जाने के लिए वह साइकिल का इस्तेमाल करते थे। उन्होंने स्नातक के अंतिम वर्ष में कोचिंग शुरू की और इसके साथ ही सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी को आगे बढ़ाया।

रोज 8 से 9 घंटे पढ़ाई, प्रीलिम्स के बाद बढ़ाई मेहनत

आदित्य के अनुसार, वह सामान्य दिनों में रोजाना करीब 8 से 9 घंटे पढ़ाई करते थे। हालांकि, प्रारंभिक परीक्षा के बाद उन्होंने पढ़ाई का समय और मेहनत दोनों बढ़ा दिए। उनका कहना है कि परीक्षा के अगले चरणों की तैयारी के दौरान पढ़ाई के प्रति अनुशासन और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।

2024 में दिया पहला प्रयास

हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने वाले आदित्य ने वर्ष 2024 में यूपीएससी का पहला प्रयास किया। वह प्रारंभिक परीक्षा में सफल रहे, लेकिन उन्हें अपनी तैयारियों में कुछ कमियां नजर आईं। इसके बाद उन्होंने दिल्ली जाकर अपनी कमजोरियों पर काम किया और तैयारी की रणनीति में जरूरी बदलाव किए।

होली-दिवाली तक छोड़ी, दूसरे प्रयास में मिली मंजिल

यूपीएससी की तैयारी के दौरान आदित्य ने कई निजी और पारिवारिक मौकों का त्याग किया। उन्होंने बताया कि पिछले कई वर्षों से वह होली और दिवाली जैसे त्योहारों पर भी घर नहीं जा सके। लगातार पढ़ाई और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखने का यह सिलसिला दूसरे प्रयास तक जारी रहा।

आखिरकार उनकी मेहनत सफल हुई और दूसरे प्रयास में उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली। 508वीं अखिल भारतीय रैंक के साथ भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयन ने उनके परिवार और गांव को गौरवान्वित किया।

आदित्य ने बताया UPSC तैयारी का तरीका

आदित्य के मुताबिक, यूपीएससी की तैयारी में सबसे पहले सही अध्ययन सामग्री का चयन करना जरूरी है। एक बार सामग्री तय करने के बाद बार-बार स्रोत बदलने के बजाय उसी पर भरोसा करके तैयारी करनी चाहिए। इसके साथ पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र यानी PYQ को समझना भी बेहद जरूरी है।

उनका मानना है कि PYQ को नजरअंदाज करने से तैयारी गलत दिशा में जा सकती है। इसलिए पाठ्यक्रम के साथ पिछले वर्षों के प्रश्नों का लगातार विश्लेषण करना चाहिए। आदित्य की कहानी उन अभ्यर्थियों के लिए मिसाल है जो सीमित संसाधनों के बावजूद सिविल सेवा में जाने का सपना देखते हैं।

 

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