11 हजार की सैलरी, 5 मकान और महंगी गाड़ियां! PNB के 17 करोड़ के फर्जी नोट कांड में संविदा कर्मचारी पर गहराया शक

सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक के करेंसी चेस्ट से बरामद 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोटों के मामले में जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। अब बैंक के एक संविदा कर्मचारी पर जांच एजेंसियों की नजर है। यह कर्मचारी महज 11 हजार रुपये महीने की तनख्वाह पर ड्राइवर-लोडर के तौर पर काम करता था, लेकिन जांच में उसके पास पांच मकान, महंगी गाड़ियां और अन्य संपत्तियां होने की बात सामने आई है।

जांच एजेंसियों को शक है कि करेंसी चेस्ट के निलंबित मैनेजर अमित कुमार और संविदा कर्मचारी की कथित मिलीभगत से असली भारतीय मुद्रा को जाली नोटों से बदला गया। अमित कुमार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी चंडीगढ़ से गिरफ्तार कर चुकी है। अब संविदा कर्मचारी की संपत्ति और करेंसी चेस्ट में उसकी भूमिका की जांच की जा रही है।

11 हजार की नौकरी, पांच मकान और महंगी गाड़ियां

सहारनपुर पुलिस और एनआईए की संयुक्त जांच में संविदा कर्मचारी की घोषित आय और उसकी संपत्तियों के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। शुरुआती जांच के अनुसार, वह कथित तौर पर पांच मकानों, एक महंगी एसयूवी, एक सेडान कार और दो मोटरसाइकिलों का वास्तविक मालिक है।

11 हजार रुपये की मासिक आय होने के बावजूद वह खुद गाड़ी चलाने के बजाय 500 रुपये प्रतिदिन की दिहाड़ी पर निजी ड्राइवर रखता था। पुलिस ने जनकपुरी और मानकमऊ स्थित उसके आवास पर छापेमारी कर जमीन-जायदाद से जुड़े दस्तावेज, बैंक खातों की जानकारी और वाहनों के पंजीकरण से संबंधित कागजात जब्त किए हैं।

करेंसी चेस्ट में मैनेजर के बेहद करीब था लोडर

आरबीआई के नियमों के तहत बैंक का करेंसी चेस्ट बेहद सुरक्षित और संवेदनशील क्षेत्र होता है। यहां सामान्य बैंक कर्मचारियों की आवाजाही भी प्रतिबंधित रहती है। कागजों में संविदा कर्मचारी की जिम्मेदारी कैश वैन चलाने और नकदी की लोडिंग-अनलोडिंग तक सीमित थी।

हालांकि, जांच में सामने आया है कि वह करेंसी चेस्ट के अंदर निलंबित मैनेजर अमित कुमार के निजी सहायक की तरह काम करता था। बताया जा रहा है कि उसे मुख्य चेस्ट क्षेत्र में बिना रोक-टोक प्रवेश हासिल था।

अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इसी पहुंच का इस्तेमाल असली नोटों के बंडलों से नकदी निकालने और उनकी जगह जाली नोट रखने में किया गया। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि असली नकदी को चेस्ट से बाहर निकालने या उसे ठिकाने लगाने में संविदा कर्मचारी की कोई भूमिका थी या नहीं।

17 करोड़ से ज्यादा के जाली नोटों का नेटवर्क तलाश रही NIA

एनआईए इस मामले में जाली नोटों की आपूर्ति के स्रोत का भी पता लगा रही है। जांच का एक अहम सवाल यह है कि 500 रुपये के उच्च गुणवत्ता वाले इतने बड़े पैमाने पर जाली नोट आखिर कहां से आए।

जांच एजेंसी इस संभावना को भी खंगाल रही है कि क्या इसके पीछे कोई विदेशी नेटवर्क या नेपाल सीमा से जुड़ा गिरोह सक्रिय था। इस मामले में जाली नोटों की पूरी आपूर्ति श्रृंखला और इसमें शामिल लोगों की भूमिका का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

बैंक शाखाओं और एटीएम तक पहुंची नकदी की भी जांच

एनआईए और आरबीआई की संयुक्त ऑडिट टीम करेंसी चेस्ट में रखी नकदी का भी बारीकी से मिलान कर रही है। जांच इस दिशा में भी आगे बढ़ रही है कि बरामद जाली नोटों में से कोई हिस्सा पहले ही बैंक की दूसरी शाखाओं, एटीएम या बाजार में तो नहीं पहुंच गया।

जांच एजेंसियां करेंसी चेस्ट से जुड़े लेनदेन, नकदी की आवाजाही और कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। संविदा कर्मचारी की कथित संपत्तियों और उसकी आय के बीच अंतर भी इस जांच का अहम हिस्सा बन गया है।

 

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