अटलांटा: भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अमेरिका के अटलांटा शहर में आयोजित जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक में वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि दुनिया के सामने मौजूद समस्याओं का समाधान सैन्य तरीकों से नहीं निकाला जा सकता, इसलिए बातचीत और कूटनीति को अवसर देना जरूरी है। बैठक के पहले पूर्ण सत्र में जयशंकर ने नागरिक जहाजों और नाविकों पर हो रहे हमलों को लेकर गंभीर चिंता जताई और इन्हें तत्काल रोकने की मांग उठाई।
नागरिक जहाजों और नाविकों पर हमले तत्काल रोकने की मांग
जयशंकर ने कहा कि नागरिक जहाजों और उनके नाविकों पर हमलों का सबसे ज्यादा असर वैश्विक दक्षिण के देशों पर पड़ रहा है। ऐसे हमलों से ईंधन, खाद्य सामग्री और उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। इसके साथ ही इन जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने समुद्री मार्गों पर जहाजों की स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करने पर जोर दिया। विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि के प्रावधानों को लागू करने की जरूरत बताई, ताकि नागरिक जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं पर तत्काल रोक लगाई जा सके।
भारत और लाइबेरिया ने नाविकों की सुरक्षा के लिए शुरू की पहल
विदेश मंत्री ने बैठक में जानकारी दी कि भारत और लाइबेरिया ने नाविकों की सुरक्षा के लिए संयुक्त पहल शुरू की है। उन्होंने कहा कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझा जिम्मेदारी है। समुद्री व्यापार में किसी भी तरह की बाधा का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था और आम लोगों की जरूरतें भी प्रभावित होती हैं।
आपूर्ति व्यवस्था को हथियार बनाने पर जताई चिंता
जयशंकर ने वैश्विक व्यापार और औद्योगिक विकास को प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बाजार में जरूरत से ज्यादा सामान उतारकर, आपूर्ति श्रृंखलाओं को हथियार बनाकर, बाजार तक पहुंच सीमित करके और बाजार में अस्थिरता पैदा करके औद्योगिक विकास की राह में बाधाएं खड़ी की जा रही हैं। उन्होंने ऐसी गतिविधियों को रोकने की जरूरत बताई। साथ ही दुनिया को आर्थिक जोखिम कम करने और व्यापार के अलग-अलग क्षेत्रों में विविधता लाने की दिशा में काम करने की सलाह दी।
मजबूत और वैकल्पिक संपर्क व्यवस्था बनाने पर जोर
भारतीय विदेश मंत्री ने वैश्विक स्तर पर मजबूत संपर्क व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता भी रेखांकित की। उन्होंने कहा कि देशों को ऐसी वैकल्पिक व्यवस्थाएं तैयार करनी चाहिए, जिनसे किसी एक मार्ग या आपूर्ति व्यवस्था पर अत्यधिक निर्भरता कम हो सके। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार को मजबूती मिलेगी और वैश्विक संकट के समय जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिलेगी।
आतंकवाद के खतरे को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
जयशंकर ने आतंकवाद के मुद्दे पर भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आगाह किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खतरे को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। यह एक बेहद जोखिम भरी गतिविधि है, जिसका नुकसान केवल उसके पीड़ितों को ही नहीं, बल्कि इसे अंजाम देने वालों को भी उठाना पड़ता है। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ गंभीरता से कार्रवाई करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
मार्को रुबियो बोले- अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए अहम समय
जी-20 विदेश मंत्रियों की इस बैठक की मेजबानी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने की। बैठक की शुरुआत में उन्होंने दुनिया के सामने मौजूद आर्थिक और भू-राजनीतिक संकटों को लेकर चिंता जताई। रुबियो ने मौजूदा परिस्थितियों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए महत्वपूर्ण समय बताया। उन्होंने कहा कि यह ऐसा दौर है, जब फैसले लेने की जरूरत है और इसका महत्व केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया इससे प्रभावित हो रही है।
