नई दिल्ली: इजरायल के हालिया राष्ट्रीय चुनाव में कथित विदेशी हस्तक्षेप की जांच अब खुफिया एजेंसी मोसाद तक पहुंच गई है। बताया जा रहा है कि मोसाद इस मामले में शिन बेट सुरक्षा एजेंसी की मदद कर रही है। जांच में कतर और तुर्की जैसे देशों की संभावित भूमिका को लेकर आशंका जताई गई है। हालांकि, दोनों देशों ने चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। वहीं, सेंट्रल इलेक्शंस कमेटी ने स्पष्ट किया है कि जांच का दायरा सीमित है और चुनाव परिणामों पर कोई सवाल नहीं उठाया गया है।
अरब मतदाताओं को पैसे देने के आरोपों से शुरू हुई जांच
यह विवाद मंगलवार को मतदान केंद्रों पर अरब मतदाताओं को पैसे देकर मतदान में उनकी भागीदारी बढ़ाने की कथित कोशिशों के आरोपों के बाद शुरू हुआ। रिश्वतखोरी के संदेह में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। बताया गया है कि पुलिस ने आरोपियों के घरों पर छापेमारी भी की। हालांकि, अब तक इन आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई सबूत सामने नहीं आया है।
प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़ रहे मामले के तार
‘टाइम्स ऑफ इजरायल’ की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि यह मामला प्रधानमंत्री कार्यालय से शुरू हुआ था। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के चीफ ऑफ स्टाफ इडो नोर्डन से मिली जानकारी के बाद पुलिस ने छापेमारी की थी। अब कथित विदेशी हस्तक्षेप के पहलुओं की जांच में मोसाद भी शिन बेट की सहायता कर रही है।
चुनाव नतीजों के बाद भी सरकार बनाने की तस्वीर साफ नहीं
इजरायल के चुनाव परिणाम आने के बाद नई संसद यानी नेसेट की तस्वीर तो साफ हो गई है, लेकिन अगली सरकार का नेतृत्व कौन करेगा, यह अभी तय नहीं हुआ है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट, दोनों में से किसी के भी खेमे को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है।
उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के मुताबिक, नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 53 सीटें मिली हैं, जबकि आइजेनकोट के नेतृत्व वाले खेमे को 48 सीटें हासिल हुई हैं। अरब नेतृत्व वाली पार्टियों ने कुल 19 सीटें जीतकर ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है। ऐसे में सरकार बनाने के लिए उनका समर्थन अहम हो सकता है।
61 सांसदों के समर्थन के बिना नहीं बनेगी सरकार
इजरायल की संसद में कुल 120 सदस्य होते हैं। किसी भी दल या गठबंधन को सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन हासिल करना जरूरी है। मौजूदा नतीजों में किसी भी खेमे के पास अपने दम पर यह आंकड़ा नहीं है। ऐसे में सरकार गठन को लेकर गठबंधन की बातचीत और राजनीतिक समीकरण महत्वपूर्ण होंगे।
इस बीच विदेशी हस्तक्षेप की जांच को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई जारी है। हालांकि, चुनाव अधिकारियों ने साफ किया है कि जांच सीमित दायरे में है और अब तक ऐसा कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है जिससे चुनाव परिणामों की वैधता पर सवाल उठे।
