दिल्ली-एनसीआर से पूर्वांचल की यात्रा करने वालों के लिए बड़ी राहत की खबर है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाली 14 किलोमीटर लंबी लिंक रोड का निर्माण तेजी से अंतिम चरण में पहुंच गया है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के मुताबिक, यदि मौसम अनुकूल रहा तो इस महत्वाकांक्षी परियोजना का काम जुलाई तक पूरा कर लिया जाएगा।
इस लिंक रोड के तैयार होते ही दिल्ली-एनसीआर से प्रयागराज, वाराणसी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों तक का सफर पहले की तुलना में काफी तेज और आसान हो जाएगा। साथ ही ट्रैफिक दबाव में भी बड़ी कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
एनसीआर से पूर्वांचल की कनेक्टिविटी को मिलेगा नया बूस्ट
फिलहाल दिल्ली-एनसीआर से पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाले यात्रियों को लंबी दूरी और भारी ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ता है। खासकर प्रयागराज, वाराणसी और आसपास के इलाकों तक पहुंचने में काफी समय लग जाता है।
लेकिन नई लिंक रोड शुरू होने के बाद यात्रियों को एक सीधा और तेज मार्ग मिलेगा, जिससे यात्रा का समय कम होगा। इसके अलावा माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी इसका बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे क्षेत्रीय व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
82 प्रतिशत काम पूरा, जुलाई तक लक्ष्य
एनएचएआई अधिकारियों के अनुसार, परियोजना का लगभग 82 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अब तक निर्माण में कोई बड़ा तकनीकी या भौगोलिक अवरोध सामने नहीं आया है और काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि अगर बारिश ने ज्यादा बाधा नहीं डाली तो जुलाई तक लिंक रोड पूरी तरह तैयार हो सकती है। इस परियोजना पर करीब 524 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
पहले से तैयार है सड़क का एक हिस्सा
जानकारी के मुताबिक, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे का पांचवां चरण जाहिदपुर तक विकसित किया जा रहा है। इसके आगे करीब 4 किलोमीटर सड़क पहले से तैयार है, जो सीधे गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ती है।
अब शेष 14 किलोमीटर हिस्से का निर्माण पूरा होते ही दोनों बड़े एक्सप्रेसवे आपस में सीधे कनेक्ट हो जाएंगे। इससे दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और मेरठ से पूर्वांचल की ओर जाने वाले लोगों को काफी राहत मिलेगी।
यात्रा समय और ट्रैफिक जाम दोनों होंगे कम
नई लिंक रोड शुरू होने के बाद वाहनों को वैकल्पिक और हाई-स्पीड रूट मिलेगा। इससे मौजूदा मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव घटेगा और लंबी दूरी की यात्रा अधिक सुगम हो सकेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह परियोजना उत्तर प्रदेश के सड़क नेटवर्क को मजबूत बनाने के साथ-साथ औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देगी। आने वाले समय में यह लिंक रोड दिल्ली-एनसीआर और पूर्वांचल के बीच एक अहम कनेक्टिविटी कॉरिडोर साबित हो सकती है।
