बलिया: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में छह साल पुराने हत्या और मारपीट के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। जिला न्यायाधीश अनिल कुमार झा की अदालत ने एक व्यक्ति की हत्या के मामले में एक ही परिवार के छह सदस्यों समेत सात लोगों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने सभी दोषियों पर भारी अर्थदंड भी लगाया है।
वहीं इसी घटना से जुड़े दूसरे पक्ष के मुकदमे में छह लोगों को दोषी करार देते हुए पांच-पांच वर्ष के कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई गई है।
पुरानी रंजिश में हुई थी हत्या
सरकारी अधिवक्ता संजीव सिंह के मुताबिक, यह मामला पकड़ी थाना क्षेत्र के टंडवा गांव का है। 30 अप्रैल 2020 की सुबह गांव निवासी सुरेंद्र नाथ पांडेय खेत से घर लौट रहे थे, तभी पुरानी रंजिश को लेकर उन पर हमला कर दिया गया।
घटना के दौरान बचाव के लिए पहुंचे जय प्रकाश पांडेय और धर्मेंद्र कुमार पांडेय के साथ भी मारपीट की गई। हमले में सुरेंद्र नाथ पांडेय की मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग घायल हो गए।
इस मामले में सुरेंद्र नाथ पांडेय के बेटे अभिषेक की तहरीर पर अजय तिवारी, उसके पुत्र आलोक और अभय, भाई उदय नारायण तिवारी, मनीष तिवारी, अमित तिवारी और सुभाष जायसवाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।
7 दोषियों को उम्रकैद और भारी जुर्माना
पुलिस जांच के बाद सभी सात आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया था। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने हत्या के मामले में सभी सात आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 1 लाख 51 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। सजा पाने वालों में एक ही परिवार के छह सदस्य शामिल बताए गए हैं।
दूसरे पक्ष के मुकदमे में भी 6 दोषी करार
इसी घटना से जुड़े दूसरे पक्ष के मुकदमे में भी अदालत ने फैसला सुनाया। रंभा देवी की शिकायत पर ग्राम प्रधान संजय वर्मा, सत्येंद्र पांडेय, अभिषेक पांडेय, लक्ष्मण वर्मा, अमरजीत वर्मा और अभिषेक वर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि खेत पर कब्जे का विरोध करने पर आरोपियों ने लाठी-डंडों से हमला किया। इस दौरान बीच-बचाव करने पहुंचे अमित कुमार तिवारी और मनीष कुमार तिवारी के साथ भी मारपीट हुई थी।
पुलिस ने जांच के बाद इस मामले में भी छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
दूसरे पक्ष के दोषियों को 5-5 साल की सजा
अदालत ने दूसरे मुकदमे में सभी छह आरोपियों को दोषी मानते हुए पांच-पांच साल के कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा प्रत्येक दोषी पर 76 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
