ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चीन भी सख्त? ट्रंप ने जिनपिंग को लेकर किया बड़ा दावा

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन यात्रा से लौटने के बाद बड़ा दावा करते हुए कहा है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी नहीं चाहते कि ईरान के पास परमाणु हथियार हों। ट्रंप के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच हुई बंद कमरे की बातचीत में इस मुद्दे पर सहमति बनी कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु बम बनाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

चीन से रवाना होने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने एयरफोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह दावा किया। उन्होंने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर शी जिनपिंग का रुख बेहद सख्त है। हालांकि चीन की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

हॉर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी बनी सहमति

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनकी और शी जिनपिंग की इस बात पर भी सहमति बनी कि हॉर्मुज स्ट्रेट का समुद्री मार्ग जल्द खोला जाना चाहिए। ट्रंप के अनुसार, इस जलमार्ग का खुला रहना वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के लिए बेहद जरूरी है।

उन्होंने दावा किया कि फिलहाल हॉर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका का प्रभावी नियंत्रण है और अमेरिकी नौसेना की आर्थिक एवं समुद्री नाकेबंदी की वजह से ईरान को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

‘ईरान को रोजाना 500 मिलियन डॉलर का नुकसान’

ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई के कारण पिछले ढाई हफ्तों में ईरान को हर दिन करीब 500 मिलियन डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि ईरान की कारोबारी गतिविधियां लगभग प्रभावित हो चुकी हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अगर ईरान हॉर्मुज जलमार्ग को बंद करने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

शी जिनपिंग की तारीफ भी की

ट्रंप ने बातचीत के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि जिनपिंग स्पष्ट रूप से मानते हैं कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए। ट्रंप के मुताबिक, चीनी राष्ट्रपति ने इस मुद्दे पर अपनी बात बेहद मजबूती से रखी।

ट्रंप ने यह भी कहा कि जिनपिंग चाहते हैं कि ईरान हॉर्मुज स्ट्रेट को खुला रखे, क्योंकि इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ता है।

चीन की ओर से नहीं आया आधिकारिक बयान

हालांकि ट्रंप के इन दावों के बाद भी चीन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अब इस बयान को लेकर कूटनीतिक और रणनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

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