गर्मी बढ़ते ही शरीर को ठंडक देने वाले आहार की मांग भी बढ़ जाती है। ऐसे में सत्तू को सबसे बेहतरीन देसी सुपरफूड माना जाता है। बिहार और उत्तर प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों में इसे गर्मियों का जरूरी आहार माना जाता है, जिसे लोग सुबह के नाश्ते में भी शामिल करते हैं। लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि जौ का सत्तू बेहतर है या चने का सत्तू।
जौ और चने का सत्तू—दोनों ही सेहत के लिए लाभकारी
सत्तू मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है—जौ का और चने का। दोनों ही पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, लेकिन शरीर पर इनका असर अलग-अलग होता है। जौ का सत्तू पाचन के लिए बेहद अच्छा माना जाता है और जिन लोगों को पेट से जुड़ी परेशानी रहती है, उनके लिए यह अधिक फायदेमंद है। इसकी तासीर ठंडी होती है, जो गर्मी में शरीर को राहत देती है और डिहाइड्रेशन से बचाव करती है।
जौ का सत्तू डायबिटीज, कब्ज, उच्च रक्तचाप और वजन कम करने वालों के लिए भी उपयोगी माना जाता है।
चना का सत्तू क्यों माना जाता है खास
चना का सत्तू प्रोटीन से भरपूर होता है और शरीर को ताकत देने में मदद करता है। यह लंबे समय तक पेट भरा रखता है और भूख को नियंत्रित करता है। इसके सेवन से इम्यूनिटी मजबूत होती है और हड्डियां भी मजबूत बनती हैं। वजन घटाने में भी यह मददगार माना जाता है क्योंकि इसमें प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है।
सत्तू के प्रमुख फायदे
सत्तू को देसी प्रोटीन भी कहा जाता है क्योंकि यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है और आसानी से पच जाता है। इसमें फाइबर, आयरन और मैग्नीशियम जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं। यह शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ-साथ लंबे समय तक भूख भी नियंत्रित करता है।
डायबिटीज के मरीजों के लिए नमकीन सत्तू लाभकारी माना जाता है क्योंकि यह ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है। साथ ही यह कोलेस्ट्रॉल और दिल की सेहत के लिए भी अच्छा माना जाता है।
सत्तू का सेवन कैसे करें
सत्तू को मीठा और नमकीन दोनों तरह से लिया जा सकता है। नमकीन सत्तू में पानी के साथ काला नमक, नींबू, भुना जीरा, प्याज और पुदीना मिलाया जाता है। मीठे सत्तू में गुड़ या चीनी मिलाकर इसका सेवन किया जाता है। इसे व्यक्ति अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार ले सकता है।
