UP में ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या पर लगेगा ब्रेक? नए रजिस्ट्रेशन पर रोक की तैयारी, हर जिले में होगा सर्वे

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में ई-रिक्शों की लगातार बढ़ती संख्या और शहरों में लगने वाले जाम को देखते हुए सरकार नए पंजीकरण पर रोक लगाने की तैयारी कर रही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के आदेश के बाद प्रदेश के सभी जिलों में ई-रिक्शों की संख्या का सर्वे कराने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए परिवहन विभाग, यातायात पुलिस और नगर निगम के अधिकारियों की संयुक्त कमेटी गठित की जा सकती है।

सर्वे में यह आकलन किया जाएगा कि किसी शहर या जिले में आवागमन की जरूरत के हिसाब से कितने ई-रिक्शों की आवश्यकता है और वर्तमान में कितने वाहन पंजीकृत हैं। यदि किसी क्षेत्र में ई-रिक्शों की संख्या जरूरत से अधिक पाई जाती है तो नए पंजीकरण पर रोक लगाने की कार्रवाई की जा सकती है।

हाईकोर्ट ने चार सप्ताह में निर्णय लेने का दिया था निर्देश

हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति एके चौधरी की पीठ ने अधिवक्ता सूरज सिंह बिसेन की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ई-रिक्शों की संख्या नियंत्रित करने की जरूरत बताई थी।

पीठ ने कहा था कि यदि किसी शहर में ई-रिक्शों का पंजीकरण निर्धारित सीमा से अधिक हो जाता है तो नए पंजीकरण पर रोक लगाने की आवश्यकता है। अदालत ने राज्य सरकार को इस संबंध में चार सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया था।

लखनऊ की सड़कों पर चल रहे करीब 1.33 लाख ई-रिक्शा

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह बात रखी गई कि लखनऊ की सड़कों पर लगभग एक लाख 33 हजार ई-रिक्शा चल रहे हैं। इनकी अधिक संख्या के कारण शहर के कई हिस्सों में जाम की समस्या पैदा हो रही है। अदालत ने माना कि ई-रिक्शों की अनियंत्रित संख्या शहरी भीड़ का एक प्रमुख कारण बन रही है। ऐसे में इनकी संख्या पर नियंत्रण जरूरी है।

पीठ ने उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव को निर्देश दिया था कि यदि लखनऊ या प्रदेश के किसी अन्य शहर में ई-रिक्शों की संख्या जरूरत से अधिक है तो मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा 39 के तहत आदेश जारी किया जा सकता है। इसके जरिए क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों को नए पंजीकरण तत्काल प्रभाव से रोकने के निर्देश दिए जा सकते हैं। यह रोक संबंधित निर्णय की समीक्षा होने तक लागू रह सकती है।

पहले सर्वे से तय होगी ई-रिक्शों की जरूरत

फिलहाल प्रदेश में शहर या जिले के हिसाब से ई-रिक्शों की कोई निर्धारित संख्या तय नहीं है। ऐसे में सरकार पहले सर्वे कराकर अलग-अलग शहरों में सार्वजनिक परिवहन और यातायात की जरूरत का आकलन कर सकती है। इसके आधार पर ई-रिक्शों की संख्या तय करने और नए पंजीकरण को नियंत्रित करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के स्तर पर भी यह मुद्दा उठाए जाने की जानकारी सामने आई थी। केंद्र ने राज्य सरकार के पत्र का जवाब दिया था, लेकिन पंजीकरण रोकने या शहरवार संख्या निर्धारित करने को लेकर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं हुआ था। मोटरयान अधिनियम के तहत वाहनों का पंजीकरण अनिवार्य बना हुआ है।

परिवहन आयुक्त बोले- आदेश देखने के बाद उठाएंगे अगला कदम

परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने बताया कि अभी उन्हें हाईकोर्ट का आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। आदेश मिलने और उसका अध्ययन करने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

ऐसे में प्रदेश में ई-रिक्शों के नए पंजीकरण पर रोक लगाने का अंतिम फैसला सरकारी स्तर पर आगे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

मोटरयान अधिनियम की धारा 39 में क्या है प्रावधान?

मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा 39 के अनुसार, कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर ऐसा मोटर वाहन नहीं चला सकता जिसका इस अधिनियम के तहत पंजीकरण न हुआ हो। वाहन का मालिक भी किसी अन्य व्यक्ति को बिना वैध पंजीकरण वाला वाहन चलाने की अनुमति नहीं दे सकता। इस प्रावधान के तहत सार्वजनिक स्थानों पर मोटर वाहनों का पंजीकरण अनिवार्य है।

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