नई दिल्ली: धनतेरस का त्योहार इस साल 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है। धनतेरस पर लोग सोना-चांदी और नई वस्तुओं की खरीदारी करने के साथ परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना भी करते हैं। अगर आप इस अवसर पर भगवान धन्वंतरि के दर्शन करना चाहते हैं, तो दक्षिण भारत के कुछ प्रमुख मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की परंपरा है। यहां कहीं औषधीय जड़ी-बूटियों की माला चढ़ाई जाती है, तो कहीं घी और तुलसी का भोग लगाया जाता है।
दक्षिण भारत के प्रसिद्ध धन्वंतरि मंदिर
1. श्री धन्वंतरि आरोग्य पीठम मंदिर, तमिलनाडु
तमिलनाडु में स्थित श्री धन्वंतरि आरोग्य पीठम मंदिर में धनतेरस के अवसर पर विशेष धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। इस दौरान भक्त भगवान धन्वंतरि को औषधीय जड़ी-बूटियों से बनी माला अर्पित करते हैं। मान्यता है कि इस विशेष पूजा के माध्यम से श्रद्धालु अपने और परिवार के सदस्यों के लिए अच्छे स्वास्थ्य तथा लंबी उम्र की प्रार्थना करते हैं।
2. तिरुमला मंदिर, आंध्र प्रदेश
आंध्र प्रदेश के तिरुमला मंदिर में भी धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की विशेष पूजा का महत्व बताया जाता है। इस अवसर पर मंदिर को फूलों से सजाया जाता है और श्रद्धालु भगवान के सामने जड़ी-बूटियां अर्पित कर आरोग्य की कामना करते हैं। भक्त सकारात्मक ऊर्जा और परिवार को बीमारियों से बचाने की प्रार्थना के साथ पूजा-अर्चना करते हैं।
3. त्रिशूर धन्वंतरि मंदिर, केरल
केरल के त्रिशूर में स्थित धन्वंतरि मंदिर में धनतेरस के दौरान विशेष रौनक रहती है। यहां गुलदस्ता पूजा और मंत्र जाप की परंपरा बताई जाती है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान धन्वंतरि की आराधना करने से निरोगी जीवन और दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है।
इस अवसर पर भगवान को घी और तुलसी के पत्तों का भोग भी लगाया जाता है। पूजा के बाद इसे श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।
4. थोट्टुवा धन्वंतरि मंदिर, केरल
केरल के थोट्टुवा में स्थित भगवान धन्वंतरि का मंदिर भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व रखता है। यहां दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगती हैं। श्रद्धालु प्राकृतिक वस्तुएं और पारंपरिक प्रसाद अर्पित कर भगवान से अपने परिवार की खुशहाली और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करते हैं।
धनतेरस पर क्यों होती है भगवान धन्वंतरि की पूजा?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद का प्रवर्तक और देवताओं का वैद्य माना जाता है। इसी वजह से धनतेरस को धन्वंतरि जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन उनकी पूजा कर लोग आरोग्य, सुख और दीर्घायु की कामना करते हैं।
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि के दर्शन और पूजा को स्वास्थ्य के प्रति मंगलकामना से जोड़कर देखा जाता है। दक्षिण भारत के इन मंदिरों में होने वाली पारंपरिक पूजा-अर्चना इस पर्व को एक अलग धार्मिक पहचान देती है।
