नेपाल में जलप्रलय से हाहाकार, 1,500 लोग लापता; 800 विदेशी पर्यटकों में सबसे ज्यादा भारतीय, दुनिया ने बढ़ाया मदद का हाथ

काठमांडू: नेपाल में आई विनाशकारी अचानक बाढ़ ने बड़े मानवीय संकट का रूप ले लिया है। बाढ़ में 160 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 1,500 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में करीब 800 विदेशी पर्यटक और तीर्थयात्री शामिल हैं। चीन से लगी नेपाल की सीमा के आसपास का इलाका आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। राहत और बचाव के लिए हेलीकॉप्टरों के साथ सेना और पुलिस की बड़ी टुकड़ियां तैनात की गई हैं।

लापता विदेशी नागरिकों में भारतीयों की संख्या सबसे ज्यादा

पर्यटन अधिकारियों के अनुसार नेपाल में कुल 826 लोग लापता बताए गए हैं, जिनमें करीब 600 विदेशी नागरिक हैं। ये विदेशी पर्यटक दो दर्जन से अधिक देशों से जुड़े हैं। इनमें भारतीय नागरिकों की संख्या सबसे ज्यादा है। करीब 300 भारतीयों के लापता होने की जानकारी है। इसके अलावा अमेरिका के 63, ऑस्ट्रेलिया के 34, ब्रिटेन के 33 और कनाडा के 25 पर्यटक भी लापता बताए गए हैं।

लापता लोगों में विभिन्न तीर्थ और पर्यटन समूहों के सदस्य शामिल हैं। एक पर्यटन एजेंसी के मुताबिक, लापता ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों में 15 लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए जा रहे थे। ये सभी भारतीय मूल के ऑस्ट्रेलियाई नागरिक बताए गए हैं। इनमें सबसे कम उम्र का सदस्य 11 साल का बच्चा है।

5,000 से ज्यादा जवान बचाव अभियान में जुटे

नेपाल की सेना के मुताबिक, 5,000 से ज्यादा सैनिक और पुलिसकर्मी राहत एवं बचाव अभियान में लगे हुए हैं। गुरुवार को अभियान के दौरान 125 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, जिनमें 20 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में हेलीकॉप्टरों के जरिए तंबू, भोजन और दूसरी जरूरी राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। भारत की ओर से भेजी गई राहत सामग्री भी प्रभावित इलाकों तक पहुंचाई जा रही है।

भारत समेत कई देशों ने भेजी मदद

नेपाल में बिगड़े हालात के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राहत अभियान शुरू हो गया है। भारत ने 10 मीट्रिक टन राहत सामग्री भेजी है, जिसमें अस्थायी आश्रय, कंबल, स्वच्छता किट, सौर लैंप और दवाइयां शामिल हैं। अमेरिका ने आपदा प्रतिक्रिया विशेषज्ञ भेजने और 5 लाख डॉलर की सहायता देने की घोषणा की है। चीन ने आपातकालीन सामग्री और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की बात कही है।

यूरोपीय संघ ने अतिरिक्त सहायता जुटाने की तैयारी जताई है। दक्षिण कोरिया ने पुलिस, आपात सेवा और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की टीम नेपाल भेजने का फैसला किया है। इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज ने नेपाल रेड क्रॉस के लिए 10 लाख स्विस फ्रैंक की आपात सहायता जारी की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दवाइयों और बहुउद्देश्यीय तंबुओं समेत जरूरी चिकित्सा सामान भेजा है।

सड़क-पुल टूटे, हेलीकॉप्टर से पहुंचाई जा रही मदद

बाढ़ के बाद कई इलाकों में सड़क और पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे जमीनी स्तर पर राहत अभियान चलाना मुश्किल हो गया है। ऐसे में हेलीकॉप्टरों के जरिए लोगों को सुरक्षित निकालने और प्रभावित क्षेत्रों तक राहत सामग्री पहुंचाने का काम किया जा रहा है। बचाव दल उन इलाकों में भी तलाशी अभियान चला रहे हैं, जहां बाढ़ का पानी और मलबा भारी तबाही छोड़ गया है।

तबाही के बीच सामने आ रहीं बचने की कहानियां

भीषण बाढ़ के बीच कुछ लोगों के चमत्कारिक रूप से बचने की घटनाएं भी सामने आई हैं। एक जीवित बचे व्यक्ति ने बताया कि बाढ़ का पानी अचानक शहर में घुसा और कुछ ही समय में हालात बेकाबू हो गए। कई लोगों को अपने परिवार के सदस्यों को बचाने तक का मौका नहीं मिल पाया। अब राहत एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश करना और दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों तक मदद पहुंचाना है।

 

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