तीस्ता नदी परियोजना को लेकर भी अपना रुख एक बार फिर किया स्पष्ट
नयी दिल्ली। भारत ने तीस्ता नदी परियोजना और सिंधु जल संधि को लेकर अपना रुख एक बार फिर स्पष्ट कर दिया । विदेश मंत्रालय ने कहा कि बांग्लादेश के साथ विकास परियोजनाएं आपसी सहमति के तय रोडमैप के अनुसार आगे बढ़ती हैं। वहीं पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि पर भारत का रुख पहले जैसा ही है और सीमा पार आतंकवाद बंद होने तक संधि स्थगित रहेगी।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि बांग्लादेश में भारत की विकास सहायता से जुड़ी परियोजनाएं दोनों देशों के बीच आपसी सहमति से तय रोडमैप के आधार पर संचालित होती हैं। इन परियोजनाओं की नियमित समीक्षा भी की जाती है। उन्होंने कहा कि तीस्ता नदी परियोजना पर भारत अपने विचार पहले ही बांग्लादेश को बता चुका है। और इस मुद्दे से जुड़े सभी पहलुओं को अपने समग्र दृष्टिकोण में शामिल करेगा।
सिंधु जल संधि पर पूछे गए सवाल के जवाब में रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत का रुख पूरी तरह स्पष्ट और पहले जैसा ही है । उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की ओर से लगातार सीमा पार आतंकवाद को समर्थन दिए जाने के कारण सिंधु जल संधि फिलहाल स्थगित है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यदि पाकिस्तान भविष्य में किसी बदलाव की उम्मीद करता है तो उसे विश्वसनीय तरीके से सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना पूरी तरह बंद करना होगा।
भारत का मानना है कि आतंकवाद और सामान्य द्विपक्षीय व्यवस्था साथ- साथ नहीं चल सकती। गौरतलब हो कि इसी सप्ताह की की शुरुआत में, पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी ने भारत को गीदड़ भभकी दी थी और नई भारत पर पानी का इस्तेमाल रणनीतिक हथियार के तौर पर करने की बात कही थी। मीडिया समाचारों के मुताबिक बिलावल ने कहा, पाकिस्तान को साफ-साफ बात करनी चाहिए। सिंधु कोई दबाव बनाने का जरिया नहीं है ।
सिंधु कोई मोल-भाव करने की चीज नहीं है। सिंधु कोई ऐसा हथियार नहीं है जिसे भारत के हाथों में सौंप दिया । बिलावल भुट्टो ने आगे कहा था, सिंधु पाकिस्तान की जीवन रेखा है। और इस जीवन रेखा को गले का फंदा बनाने की किसी भी कोशिश को हमारे देश के अस्तित्व के लिए खतरा माना जाना चाहिए । यही संदेश पाकिस्तान को भारत तक पहुंचाना चाहिए ।
पाकिस्तान की तरफ से ऐसे बयान बार-बार सामने आ रहे हैं, लेकिन भारत का हर बार एक ही जवाब है कि पहले पाकिस्तान अपने यहां आतंकवाद खत्म करे, तभी भारत बातचीत करने के लिए तैयार होगा । जायसवाल ने आगे कहा हम तीस्ता मुद्दे पर अपने समग्र दृष्टिकोण में सभी संबंधित घटनाक्रमों को ध्यान में रखेंगे। विदेश मंत्रालय की तरफ से ये टिप्पणियां बांग्लादेश और चीन के बीच भारत से बहने वाली तीस्ता और अन्य सीमा पार नदियों के प्रबंधन पर सहयोग करने पर सहमत होने के कुछ दिनों बाद आई हैं।
