प्रमुख सचिव प्रदीप दुबे को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, फिलहाल कोई अंतरिम आदेश नहीं; विधानसभा सचिवालय से मांगा जवाब

लखनऊ : उत्तर प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव प्रदीप दुबे के पद पर बने रहने को चुनौती देने वाली याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने फिलहाल किसी भी प्रकार की अंतरिम कार्रवाई से इनकार कर दिया है। अदालत ने प्रतिवादी पक्ष को अपना जवाब दाखिल करने का अवसर देते हुए मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई 2026 तय की है।

याचिका की ग्राह्यता पर उठी प्रारंभिक आपत्ति

सुनवाई के दौरान विधानसभा सचिवालय की ओर से खंडपीठ के समक्ष प्रारंभिक आपत्ति दर्ज कराई गई। सचिवालय ने कहा कि मामले के गुण-दोष पर विचार करने से पहले याचिका की ग्राह्यता (मेंटेनेबिलिटी) पर निर्णय लिया जाना आवश्यक है। अदालत ने इस आपत्ति को गंभीरता से लेते हुए प्रतिवादी पक्ष को संक्षिप्त प्रतिशपथ-पत्र दाखिल करने का समय दिया।

अंतरिम राहत की मांग पर अदालत ने नहीं दी मंजूरी

याचिकाकर्ता की ओर से मामले में तत्काल अंतरिम राहत देने की मांग की गई थी, लेकिन न्यायालय ने इस स्तर पर कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना प्रतिवादी पक्ष का जवाब प्राप्त किए मामले पर कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

2012 से पद पर कार्यरत हैं प्रदीप दुबे

सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह भी बताया गया कि प्रदीप दुबे वर्ष 2012 से उत्तर प्रदेश विधानसभा में प्रमुख सचिव के पद पर कार्यरत हैं। न्यायालय ने माना कि इतने लंबे समय से पद संभाल रहे अधिकारी से जुड़े मामले में सभी पक्षों को सुनना आवश्यक है। ऐसे में प्रतिवादी का पक्ष जाने बिना कोई फैसला लेना उचित नहीं माना जा सकता।

नियुक्ति पर फिलहाल कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं

अदालत के आदेश से यह साफ हो गया है कि अभी तक प्रदीप दुबे की नियुक्ति या उनके पद पर बने रहने को लेकर कोई प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। न्यायालय ने केवल याचिका की ग्राह्यता समेत अन्य कानूनी पहलुओं पर प्रतिवादी पक्ष से जवाब मांगा है।

अब इस मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई 2026 को होगी, जिसमें विधानसभा सचिवालय अपना विस्तृत पक्ष अदालत के समक्ष रखेगा।

 

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