धनंजय सिंह नई दिल्ली। बलूचिस्तान के पथरीले पहाड़ों और तपते रेगिस्तानों से उठी एक आवाज ने आज पाकिस्तान के सबसे शक्तिशाली संस्थान—रावलपिंडी के सैन्य मुख्यालय (GHQ)—की नीदें उड़ा रखी हैं। यह आवाज किसी बंदूकधारी विद्रोही की नहीं, बल्कि 30 साल की एक युवा महिला डॉक्टर की है, जिसका नाम है डॉ. माहरंग बलोच। हालिया महीनों में बलूचिस्तान के कोने-कोने में हुए अभूतपूर्व विरोध प्रदर्शनों और बलोच यकजेहती कमेटी (BYC) के बढ़ते प्रभाव ने यह साफ कर दिया है कि आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर की अत्याधुनिक हथियारों से लैस सेना…
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