अयोध्या दीपोत्सव से कुम्हार परिवारों की चमकी किस्मत, किसी को एक लाख तो किसी को मिले दो लाख दीयों के ऑर्डर

अयोध्या: दीपोत्सव 2026 अयोध्या के कुम्हार परिवारों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर लेकर आया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में दीपोत्सव को भव्य स्वरूप दिए जाने से मिट्टी के दीयों की मांग बढ़ी है। इसका लाभ स्थानीय कारीगरों को मिल रहा है। बड़े ऑर्डर मिलने से परिवारों की आमदनी बढ़ने के अवसर बने हैं, वहीं युवा भी पारंपरिक मिट्टी कला से जुड़कर अपने गांव में ही भविष्य संवार रहे हैं।

बड़े ऑर्डर से स्थानीय स्तर पर मिल रहा रोजगार

जयसिंहपुर गांव के बृज किशोर प्रजापति बताते हैं कि दीपोत्सव शुरू होने के बाद से उनका पूरा परिवार दीये बनाने के काम में जुटा है। इस बार उन्हें एक लाख दीयों का ऑर्डर मिला, जिसे समय से तैयार कर पहुंचा दिया गया। गांव के ही राजेश प्रजापति को दो लाख दीये बनाने का ऑर्डर मिला है। उनके परिवार के सभी सदस्य मिलकर इस काम को पूरा कर रहे हैं।

राजेश प्रजापति के मुताबिक, पहले पूरे महीने में मुश्किल से 20 से 25 हजार रुपये की कमाई हो पाती थी, लेकिन अब दीपोत्सव के सीजन में लाखों रुपये की आमदनी होने का अवसर मिलता है। बड़े ऑर्डर मिलने से कुम्हार परिवारों को स्थानीय स्तर पर काम मिल रहा है और उन्हें रोजगार की तलाश में दूसरे शहरों का रुख करने की जरूरत कम हो रही है।

इलेक्ट्रिक चाक से उत्पादन में तेजी, गुणवत्ता में सुधार

कुम्हार परिवारों को इलेक्ट्रिक चाक उपलब्ध कराए जाने से दीये बनाने का काम पहले की तुलना में तेज हुआ है। पारंपरिक हुनर के साथ आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल से उत्पादन क्षमता बढ़ाने और दीयों की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिल रही है।

जयसिंहपुर, विद्याकुण्ड और सोहावल के ड्योढ़ी जैसे गांवों में कुम्हार परिवार दीपोत्सव की तैयारियों में जुटे हैं। घरों में मिट्टी गूंथने, दीये बनाने और उन्हें सुखाने का काम लगातार चल रहा है। दीपोत्सव में मिट्टी के दीयों को प्राथमिकता मिलने से स्थानीय कारीगरों को बड़े ऑर्डर हासिल करने के अवसर मिल रहे हैं। इससे पारंपरिक कला को आगे बढ़ाने के साथ परिवारों की आजीविका को भी सहारा मिल रहा है।

राम की पैड़ी पर 30 लाख दीप जलाने का लक्ष्य

दसवें दीपोत्सव के लिए 7 नवंबर को राम की पैड़ी पर 30 लाख दीप प्रज्ज्वलित करने का लक्ष्य रखा गया है। आयोजन की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, क्वीन हो मेमोरियल पार्क में 17.64 लाख दीये घाट स्थित गोदाम में पहुंच चुके हैं।

आयोजन को सफल बनाने के लिए अवध विश्वविद्यालय के छात्र, अधिकारी और स्वयंसेवी संगठन भी तैयारियों में जुटे हैं। दीपोत्सव की व्यवस्थाओं में सहयोग के लिए करीब 35 हजार स्वयंसेवकों को लगाया गया है।

पारंपरिक मिट्टी कला को मिल रही नई पहचान

अयोध्या का दीपोत्सव स्थानीय कुम्हार परिवारों के लिए पारंपरिक हुनर को रोजगार से जोड़ने का अवसर बन रहा है। मिट्टी के दीयों की मांग, बड़े ऑर्डर और आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल से कारीगरों को अपने काम का विस्तार करने में मदद मिल रही है। आयोजन में स्थानीय कारीगरों की बढ़ती भागीदारी से मिट्टी के दीये बनाने की परंपरा को नई पहचान मिल रही है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिल रहा है।

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