पणजी/मुंबई। अपनी दमदार अदाकारी, तीखे संवाद और बेबाक अंदाज से दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का निधन हो गया है। 75 वर्ष की आयु में उन्होंने गोवा स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली।
डॉक्टरों के अनुसार, उनके निधन का कारण अचानक आया कार्डियक अरेस्ट (हृदय गति रुकना) बताया जा रहा है। गोवा के डोना पौला स्थित आवास पर सुबह जब वे अचेत पाए गए, तो उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस दुखद खबर के सामने आते ही पूरे फिल्म जगत और देश भर के प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई है।
फिल्म जगत और नेताओं ने जताया शोक
नाना पाटेकर के अचानक चले जाने से बॉलीवुड, मराठी फिल्म इंडस्ट्री और राजनीतिक गलियारों में गम का माहौल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, महाराष्ट्र सरकार के प्रतिनिधियों सहित सिनेमा जगत की तमाम बड़ी हस्तियों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। निर्माता-निर्देशक रामगोपाल वर्मा ने अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें अभिनय का “विजार्ड” करार दिया और कहा कि सिनेमा ने आज अपना एक बेजोड़ कलाकार खो दिया है। सोशल मीडिया पर ‘क्रांतिवीर’ में उनके द्वारा दिए गए ऐतिहासिक संवाद और वीडियो जमकर ट्रेंड कर रहे हैं।
थिएटर से लेकर नेशनल अवॉर्ड तक का शानदार सफर
१ जनवरी 1951 को जन्मे नाना पाटेकर (विश्वनाथ पाटेकर) ने अपने करियर की शुरुआत थिएटर से की थी। इसके बाद उन्होंने हिंदी और मराठी फिल्मों में ऐसे यादगार किरदार निभाए जो हमेशा के लिए अमर हो गए।
यादगार फिल्में: ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘तिरंगा’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘खामोशी: द म्यूजिकल’, ‘अपहरण’, ‘अब तक छप्पन’ और ‘वेलकम’ जैसी सुपरहिट फिल्मों में उनके अभिनय को अपार सराहना मिली।
सम्मान: उत्कृष्ट अभिनय के लिए उन्हें 3 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (National Film Awards) और पद्मश्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।
सामाजिक कार्यों में भी थे अग्रणी
नाना पाटेकर केवल एक महान अभिनेता ही नहीं, बल्कि एक बेहद संवेदनशील इंसान भी थे। उन्होंने ‘नाम फाउंडेशन’ (Naam Foundation) की स्थापना की थी, जिसके जरिए वे महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त क्षेत्रों और संकटग्रस्त किसानों की आर्थिक व सामाजिक मदद में हमेशा आगे रहते थे। भारतीय सिनेमा में उनके अप्रतिम योगदान और समाज सेवा को हमेशा याद रखा जाएगा।
