नई दिल्ली: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत की ओर से भेजी गई त्वरित राहत सहायता की कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सराहना की है। हालांकि, उन्होंने भारतीय मीडिया को 2015 के नेपाल भूकंप के दौरान हुई कवरेज से सबक लेने की सलाह दी। थरूर ने कहा कि मानवीय संकट के समय मदद का इस तरह प्रचार नहीं होना चाहिए कि पीड़ितों को यह महसूस हो कि उनकी मदद करके कोई उन पर एहसान जता रहा है। उन्होंने नेपाल को एक संप्रभु और समान देश के रूप में सम्मान देने पर जोर दिया।
2015 की कवरेज का जिक्र कर मीडिया को दी नसीहत
काठमांडू में आयोजित एक टीवी कार्यक्रम में शशि थरूर ने कहा कि 2015 के भूकंप के दौरान भारत ने नेपाल की काफी मदद की थी, लेकिन भारतीय मीडिया के एक हिस्से ने जिस तरह से राहत कार्यों को प्रस्तुत किया, वह उचित नहीं था। उनके मुताबिक, सहायता वास्तविक और सराहनीय थी, लेकिन उसका प्रचार-प्रसार कई जगह बढ़ा-चढ़ाकर किया गया, जिससे गलत संदेश गया। थरूर ने कहा कि सरकार के साथ-साथ मीडिया को भी भारत-नेपाल संबंधों की संवेदनशीलता को समझना चाहिए।
2015 में भी उठे थे मीडिया कवरेज पर सवाल
नेपाल में 2015 में आए विनाशकारी भूकंप के दौरान भारतीय मीडिया के एक वर्ग की राहत कवरेज को लेकर नेपाल में काफी नाराजगी सामने आई थी। थरूर ने इसी पुराने अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि आपदा में फंसे लोगों को बार-बार यह बताने की जरूरत नहीं होती कि उनकी मदद कौन कर रहा है। उनके अनुसार, राहत पहुंचाने का उद्देश्य जरूरतमंदों की मदद करना होना चाहिए, न कि उसके बदले प्रचार हासिल करना।
‘पड़ोसी ऐसा ही करते हैं, सरकार और मदद करेगी’
नेपाल में मौजूदा त्रासदी के बाद भारत की ओर से की गई सहायता का स्वागत करते हुए थरूर ने कहा कि पड़ोसी देशों के बीच मुश्किल समय में एक-दूसरे के साथ खड़ा होना स्वाभाविक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नेपाल को आगे भी जरूरी राहत सहायता मिलती रहेगी। थरूर ने कहा कि भारत नेपाल का सबसे करीबी पड़ोसी है और इस समय एकजुटता के साथ उसके साथ खड़ा होना ही सही तरीका है।
2015 की आर्थिक नाकाबंदी को बताया ‘बड़ी भूल’
भारत-नेपाल संबंधों पर बात करते हुए थरूर ने 2015 की अघोषित आर्थिक नाकाबंदी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह उस समय भी इसके मुखर आलोचक रहे थे। थरूर ने इसे हिमालयी भूल बताते हुए कहा कि भले ही भारत सरकार ने उस समय नाकाबंदी से किसी तरह का संबंध होने से इनकार किया था, लेकिन इस घटनाक्रम से दोनों देशों के रिश्तों को नुकसान पहुंचा।
‘रोटी-बेटी के रिश्ते से आगे बढ़ना जरूरी’
थरूर ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता महत्वपूर्ण है, लेकिन दोनों देशों के संबंध केवल इसी तक सीमित नहीं रहने चाहिए। उन्होंने कहा कि रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए सम्मानजनक संवाद बेहद जरूरी है। नेपाल को एक संप्रभु और समान देश के तौर पर वह सम्मान मिलना चाहिए जिसका वह हकदार है। साथ ही, भारत को यह भी दिखाना चाहिए कि नेपाल के विचार और उसकी चिंताएं उसके लिए महत्वपूर्ण हैं।
