लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा की कार्यवाही के दौरान अनुशासन को लेकर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने एक सख्त संदेश दिया है। सदन के भीतर मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर पाबंदी के बावजूद, बीजेपी के वरिष्ठ विधायक चौधरी बाबूलाल सदन में फोन पर बात कर रहे थे। इसे नियमों का उल्लंघन मानते हुए अध्यक्ष ने तत्काल उनका फोन जब्त करने का आदेश दिया, जिससे सदन में सन्नाटा पसर गया।
सदन की मर्यादा पर सख्त रुख
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना शुरू से ही सदन की गरिमा और अनुशासन को लेकर बेहद गंभीर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सदन चर्चा के लिए है, न कि निजी कॉल अटेंड करने के लिए। बीजेपी विधायक द्वारा फोन का उपयोग करना अध्यक्ष को नागवार गुजरा और उन्होंने बिना किसी पक्षपात के अनुशासनात्मक कार्रवाई की।
नियम विरुद्ध फोन का इस्तेमाल
घटना उस समय हुई जब सदन में महत्वपूर्ण विधायी कार्य चल रहे थे। आगरा की खेरागढ़ सीट से विधायक चौधरी बाबूलाल अपनी सीट पर बैठकर फोन का उपयोग कर रहे थे। जब स्पीकर की नजर उन पर पड़ी, तो उन्होंने मार्शल को फोन लाने का निर्देश दिया।
सत्ता पक्ष के विधायक पर कार्रवाई से बढ़ा हड़कंप
आमतौर पर ऐसी कार्रवाइयों को लेकर विपक्षी दलों में चर्चा रहती है, लेकिन अपनी ही पार्टी (बीजेपी) के विधायक पर स्पीकर के इस कड़े रुख ने सभी को चौंका दिया। इससे यह स्पष्ट हो गया कि सदन के नियम सभी सदस्यों के लिए बराबर हैं, चाहे वह सत्ता पक्ष का हो या विपक्ष का।
पहले भी दी जा चुकी थी चेतावनी
सतीश महाना ने कार्यकाल की शुरुआत में ही सभी विधायकों को सख्त निर्देश दिए थे कि सदन के भीतर मोबाइल फोन का इस्तेमाल वर्जित है। कई बार चेतावनी देने के बाद भी जब इस नियम का उल्लंघन हुआ, तो अध्यक्ष ने फोन जब्त करने जैसा कड़ा कदम उठाया ताकि भविष्य में ऐसी गलती न हो।
सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा
यह खबर सामने आते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। लोग स्पीकर सतीश महाना के इस फैसले की सराहना कर रहे हैं। चर्चा है कि इस घटना के बाद अब अन्य विधायक सदन की कार्यवाही के दौरान अधिक सतर्क और अनुशासित रहेंगे।
